राजनीति विज्ञान- पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण

पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण
Reservation for Backward classes

पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण (Reservation for Backward Classes]

प्रधानमन्त्री वी. पी. सिंह ने 7 अगस्त, 1990 को संसद के दोनों सदनों में घोषित किया कि भारत सरकार की सेवाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में पिछड़े हुए वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा। प्रधानमन्त्री ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। 13 अगस्त, 1990 को इस सम्बन्ध में सरकारी अधिसूचना जारी की गई।
युवा आन्दोलन (Youth Movement)-मण्डल आयोग की रिपोर्ट पर प्रारम्भ से ही तीव्र विवाद था। लोगों का यह मानना था कि शासन द्वारा पिछड़े वर्गों को 27% आरक्षण देने का निर्णय एकतरफा और आकस्मिक था। यह बात भी स्पष्ट हो गई कि शासन द्वारा लिया गया यह निर्णय राजनीतिक कारणों से प्रेरित था। इसने भावुकता भरे युवा आन्दोलन को जन्म दिया। आन्दोलन के विरोध की तीव्रता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि आरक्षण के विरोध में 150 से अधिक युवाओं ने आत्मदाह की कोशिश की, कुल 63 लोगों की जानें गई।
मण्डल आयोग की सिफारिशें कानूनी पचड़े में भी फस गई। सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर, 1990 को मण्डल आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन पर स्थगन आदेश जारी कर दिया।न्यायालय ने यह कहा कि सम्बन्धित अधिसूचना को स्थगित किया जाता है लेकिन सरकार
इसके अन्तर्गत लाभान्वित होने वाली जातियों को चिन्हित करने का काम कर सकती है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आन्दोलन स्थगित हो गया।

नरसिम्हा राव सरकार की घोषणा (Announcement by Narsimha Rao Government)

25 सितम्बर, 1991 को नरसिम्हा राव सरकार ने घोषणा की कि पिछड़े हुए वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जायेगा। इसके साथ ही यह भी घोषित किया गया कि अब आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा।
सरकार की इस घोषणा को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इस प्रकरण पर 16 नवम्बर, 1992 को दिये गये निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, "दो वर्ष पूर्व राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार द्वारा अन्य पिछड़ी जातियों के लिये 27 प्रतिशत आरक्षण का जो आदेश लागू किया गया था वह वैध और लागू करने योग्य हैं।" परन्तु इसी के साथ न्यायालय ने इसमें पाँच नये बिन्दु जोड़ दिये-
(1) पिछड़ी जातियों के सम्पन्न व्यक्तियों (Creamy Layer) को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा;
(2) अधिकतम आरक्षण कुल स्थानों का 50% हो सकता है;
(3) आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण की नरसिंह राव सरकार की नीति असंवैधानिक है।
(4) आरक्षण केवल नौकरियों में होगा पदोन्नति में नहीं;
(5) सरकार एक आयोग का गठन करे जो यह पता लगाये कि किन-किन जातियों या लोगों मिलना । गैर-हिन्दुओं, सिक्खों तथा ईसाइयों में भी यह पता लगाया जाना चाहिए।

पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू (Reservation Implemented for Backward Classes)

केन्द्र सरकार द्वारा 8 सितम्बर, 1993 से आरक्षण की व्यवस्था लागू कर दी गई। सरकार ने यह निर्धारित किया कि पहले चरण में उन जातियों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनके नाम मण्डल आयोग की सूची और राज्य सरकार की सूची दोनों में सम्मिलित हों। ऐसी जातियों की संख्या लगभग 1200 है।
केन्द्र सरकार द्वारा आरक्षण की व्यवस्था लागू किये जाने के उपरान्त राज्यों द्वारा भी इसे लागू किया गया। कुछ राज्यों पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण पहले से ही लागू था। विभिन्न राज्यों में पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण  भिन्न-भिन्न है। उत्तर प्रदेश में यह 27 प्रतिशत तो मध्य प्रदेश में यह 14 प्रतिशत है।आरक्षण की कोई समय-सीमा नही निर्धारित की गई है।

राजनीति विज्ञान- पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण राजनीति विज्ञान- पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण Reviewed by rajyashikshasewa.blogspot.com on 8:15 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.