गणित- संख्या पद्धति [Number System Formulas]


*Number System Formulas*
संख्या पद्धति


वह पद्धति जिसमें विभिन्न संख्या और उनके गुणन का अध्ययन किया जाता है। “संख्या पद्धति” कहलाती है। अथवा
किसी भौतिक राशि के परिणामों को बोध कराने के लिए जिस पद्धति का प्रयोग किया जाता हैं।
संख्या पद्धति को उनके गुणो के अनुसार निम्नलिखित भागो में बाटा गया है –

प्राकृतिक संख्या (Natural Number):- ऐसी संख्याएँ जो वस्तुओं के गिनने के काम आती है उन्हें प्राकृतिक संख्या कहते हैं प्राकृतिक संख्या को N प्रकट करते हैं। 0 प्राकृतिक संख्या नहीं होती है 

उदाहरण में- N = { 1, 2, 3, 4, 5 ………… ∞ }

पूर्ण संख्याऐं (Whole Numbers):- यदि प्राकृतिक संख्या में 0 को शामिल कर लिया जाय तो जो संख्याएँ प्राप्त होती है वे संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ होती है पूर्ण संख्या को W से प्रकट करते हैं।

जैसे-: 0, 1, 2, 3, 4 ….. ∞

नोट:- सभी पूर्ण संख्याएं, धनात्मक पूर्णांक, परिमेय एवं वास्तविक होती है। सभी प्राकृतिक संख्याएं पूर्ण संख्या है, लेकिन सभी पूर्ण संख्या प्राकृतिक संख्या नहीं है। जैसे-: 0 

पूर्णांक संख्याएँ (Integers Number):- प्राकृतिक संख्या, शुन्य, तथा ऋणात्मक संख्याओं के समुह को ही पूर्णांक संख्याएँ कहते है पूर्णांक संख्याओं को I अथवा Z से प्रकट करते हैं।
उदाहरण में- Z = {∞ …..….-4,-3,-2,-1,0,1,2,3,4,…………∞ }

वास्तविक संख्या (Real no.):-दशमलव भिन्न,ऋणात्मक, धनात्मक वर्गमूल, मिश्र सभी वास्तविक संख्याएं हैं
3/4,1/2,-17,8.7

Exception- अवास्तविक=
-1/0,√-l

सम संख्याऐं (Even numbers):– दो से विभाजित होने वाली प्राकृतिक संख्या “सम संख्याऐं” कहलाती है। सम संख्याओं को E से प्रकट करते है।

जैसे-: 2, 4, 6, 8…….∞

विषम संख्याऐं (Odd numbers):– वे प्राकृतिक संख्या जो 2 से विभाजित नहीं होती हो “विषम संख्याएं” कहलाती है।  विषम संख्याओं को O से प्रकट करते है।

जैसे:-1, 3, 5……. ∞ 

भाज्य संख्या (Co-Prime Numbers):– ऐसी प्राकृतिक संख्या जो 1 या अपने को छोड़कर अन्य संख्या से विभाजित हो, “भाज्य संख्या” कहलाती है। जैसे:- 4, 6, 9 ……

अभाज्य संख्या (Prime Numbers or Composite Number):– वे प्राकृतिक संख्या जो केवल 1 या अपने आप से विभाजित हो सके,अभाज्य संख्याएं कहलाती है।

जैसे:-2, 3, 5, 7 …..

परिमेंय संख्याएँ (Rational Number):- ऐसी संख्याएँ जो p/q के रुप में होती हैं जहाँ p और q पूर्णांक संख्याएँ है और q≠0 है इसका मतलब यह है कि q का मान 0 के बराबर नही होगा । परिमेय संख्याओं को Q से प्रकट करते है।

जैसे- 5/7, 8/9, 4/7, 0, 7/9 इत्यादि

अपरिमेंय संख्याएँ (Irrational Number):- परिमेय संख्याओं को छोड़कर जितनी संख्याएँ होती है, अपरिमेय सख्याएँ होती है ।

जैसे:- √2, √3, -√2, -√3, √5 , π , √7 …… इत्यादि

वास्तविक संख्याएँ (Real Number):- परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं के समुच्चय को ही वास्तविक संख्याएँ कहा जाता है।

 जैसे:- 2/3, 8/9, 7/10, 0, √2, √3, -√2, -√3, √5 , π , √7 …… इत्यादि

दशमलव भिन्न (Decimal Fraction):- ऐसी भिन्नात्मक संख्याएँ जिनका हर 10 हो या 10 की घात हो उसे दशमलव भिन्न कहते हैं ।

जैसे: -7/10, 17/100, 11/1000, 3/10000, …… इत्यादि

अत्रिभाज्य संख्याएँ (Prime Triplet Number):- वे तीन प्राकृतिक संख्याएँ जिनका महत्तम समापवर्तक (H.C.F) 1 हो, अत्रिभाज्य संख्याएँ कहलाती है ।

जैसे:- 8 , 9 तथा 25 अत्रिभाज्य संख्याएँ है

100 तक की अभाज्य संख्याएं

2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89, 97= कुल 25 संख्याएं

Note –

    1 न तो भाज्य संख्या है, और न ही अभाज्य संख्या।
    2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है
    2 एक मात्र ऐसी सम संख्या है,जो रूढ़ संख्या भी है।
    3 सबसे छोटी विषम अभाज्य संख्या है।
    4 सबसे छोटी भाज्य संख्या है।
    9 सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या है।
    1 से 100 तक कुल अभाज्य संख्या-25
    1 से 50 तक कुल अभाज्य संख्या-15
    1 से 25 तक कुल अभाज्य संख्या-9
    25 से 50 तक कुल अभाज्य संख्या-6
    50 से 100 तक कुल अभाज्य संख्या-10
    अंक 0 से 9 तक होते हैं अतः अंको की संख्या 10 होती है
     संख्या 1 से शुरु होती है संख्या अनंत होती है
    एक अंकीय संख्या 9 होती है
    दो अंकीय संख्या 90 होती है
    तीन अंकीय संख्या 900 होती हैं
    चार अंकीय संख्या 9000 होती हैं

इसी प्रकार … 

    1 से 100 तक की संख्याओ में शून्य के अंक 11 होते हैं
    1 से 100 तक की संख्याओ में एक के अंक 21होते हैं
    1 से 100 तक की संख्याओ में 2 से 9 तक प्रत्येक अंक 20 बार आते है
    1 से 100 तक की संख्याओ में कुल अंक 192 होते हैं

कैसे :-

1 से 100 तक इकाई अंक = 100
1 से 100 तक दहाई अंक = 91
1 से 100 तक सैकड़ा के अंक = 1

Total = 100+ 91+1 =192

2 से भाजकता का*Number System Formulas, Tricks*
संख्या पद्धति

वह पद्धति जिसमें विभिन्न संख्या और उनके गुणन का अध्ययन किया जाता है। “संख्या पद्धति” कहलाती है। अथवा
किसी भौतिक राशि के परिणामों को बोध कराने के लिए जिस पद्धति का प्रयोग किया जाता हैं।
संख्या पद्धति को उनके गुणो के अनुसार निम्नलिखित भागो में बाटा गया है –

प्राकृतिक संख्या (Natural Number):- ऐसी संख्याएँ जो वस्तुओं के गिनने के काम आती है उन्हें प्राकृतिक संख्या कहते हैं प्राकृतिक संख्या को N प्रकट करते हैं। 0 प्राकृतिक संख्या नहीं होती है 

उदाहरण में- N = { 1, 2, 3, 4, 5 ………… ∞ }

पूर्ण संख्याऐं ( Whole Numbers ) :- यदि प्राकृतिक संख्या में 0 को शामिल कर लिया जाय तो जो संख्याएँ प्राप्त होती है वे संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ होती है पूर्ण संख्या को W से प्रकट करते हैं।

जैसे-: 0, 1, 2, 3, 4 ….. ∞

नोट:- सभी पूर्ण संख्याएं, धनात्मक पूर्णांक, परिमेय एवं वास्तविक होती है। सभी प्राकृतिक संख्याएं पूर्ण संख्या है, लेकिन सभी पूर्ण संख्या प्राकृतिक संख्या नहीं है। जैसे-: 0 

पूर्णांक संख्याएँ ( Integers Number ):- प्राकृतिक संख्या, शुन्य, तथा ऋणात्मक संख्याओं के समुह को ही पूर्णांक संख्याएँ कहते है पूर्णांक संख्याओं को I अथवा Z से प्रकट करते हैं।
उदाहरण में- Z = {∞ …..….-4,-3,-2,-1,0,1,2,3,4,…………∞ }

वास्तविक (Real no.)-  दशमलव भिन्न,ऋणात्मक ,धनात्मक वर्गमूल ,मिश्र सभी वास्तविक संख्याएं हैं
3/4,1/2,-17,8.7

Exception- अवास्तविक=
-1/0,√-l

सम संख्याऐं ( Even numbers ) – दो से विभाजित होने वाली प्राकृतिक संख्या “सम संख्याऐं” कहलाती है। सम संख्याओं को E से प्रकट करते है।

जैसे-: 2, 4, 6, 8…….∞

विषम संख्याऐं ( Odd numbers ) – वे प्राकृतिक संख्या जो 2 से विभाजित नहीं होती हो “विषम संख्याएं” कहलाती है।  विषम संख्याओं को O से प्रकट करते है।

जैसे:-1, 3, 5……. ∞ 

भाज्य संख्या ( Co-Prime Numbers ) – ऐसी प्राकृतिक संख्या जो 1 या अपने को छोड़कर अन्य संख्या से विभाजित हो, “भाज्य संख्या” कहलाती है। जैसे:- 4, 6, 9 ……

अभाज्य संख्या ( Prime Numbers or Composite Number) – वे प्राकृतिक संख्या जो केवल 1 या अपने आप से विभाजित हो सके,अभाज्य संख्याएं कहलाती है।

जैसे:-2, 3, 5, 7 …..

परिमेंय संख्याएँ ( Rational Number ):- ऐसी संख्याएँ जो p/q के रुप में होती हैं जहाँ p और q पूर्णांक संख्याएँ है और q≠0 है इसका मतलब यह है कि q का मान 0 के बराबर नही होगा । परिमेय संख्याओं को Q से प्रकट करते है।

जैसे- 5/7, 8/9, 4/7, 0, 7/9 इत्यादि

अपरिमेंय संख्याएँ ( Irrational Number ):- परिमेय संख्याओं को छोड़कर जितनी संख्याएँ होती है, अपरिमेय सख्याएँ होती है ।

जैसे:- √2, √3, -√2, -√3, √5 , π , √7 …… इत्यादि

वास्तविक संख्याएँ ( Real Number ):- परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं के समुच्चय को ही वास्तविक संख्याएँ कहा जाता है।

 जैसे:- 2/3, 8/9, 7/10, 0, √2, √3, -√2, -√3, √5 , π , √7 …… इत्यादि

दशमलव भिन्न (Decimal Fraction):- ऐसी भिन्नात्मक संख्याएँ जिनका हर 10 हो या 10 की घात हो उसे दशमलव भिन्न कहते हैं ।

जैसे: -7/10, 17/100, 11/1000, 3/10000, …… इत्यादि

अत्रिभाज्य संख्याएँ ( Prime Triplet Number):- वे तीन प्राकृतिक संख्याएँ जिनका महत्तम समापवर्तक (H.C.F) 1 हो, अत्रिभाज्य संख्याएँ कहलाती है ।

जैसे:- 8 , 9 तथा 25 अत्रिभाज्य संख्याएँ है

100 तक की अभाज्य संख्याएं

2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89, 97= कुल 25 संख्याएं

Note –

    1 न तो भाज्य संख्या है, और न ही अभाज्य संख्या।
    2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है
    2 एक मात्र ऐसी सम संख्या है,जो रूढ़ संख्या भी है।
    3 सबसे छोटी विषम अभाज्य संख्या है।
    4 सबसे छोटी भाज्य संख्या है।
    9 सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या है।
    1 से 100 तक कुल अभाज्य संख्या-25
    1 से 50 तक कुल अभाज्य संख्या-15
    1 से 25 तक कुल अभाज्य संख्या-9
    25 से 50 तक कुल अभाज्य संख्या-6
    50 से 100 तक कुल अभाज्य संख्या-10
    अंक 0 से 9 तक होते हैं अतः अंको की संख्या 10 होती है
     संख्या 1 से शुरु होती है संख्या अनंत होती है
    एक अंकीय संख्या 9 होती है
    दो अंकीय संख्या 90 होती है
    तीन अंकीय संख्या 900 होती हैं
    चार अंकीय संख्या 9000 होती हैं

इसी प्रकार … 

    1 से 100 तक की संख्याओ में शून्य के अंक 11 होते हैं
    1 से 100 तक की संख्याओ में एक के अंक 21होते हैं
    1 से 100 तक की संख्याओ में 2 से 9 तक प्रत्येक अंक 20 बार आते है
    1 से 100 तक की संख्याओ में कुल अंक 192 होते हैं

कैसे :-

1 से 100 तक इकाई अंक = 100
1 से 100 तक दहाई अंक = 91
1 से 100 तक सैकड़ा के अंक = 1

Total = 100+ 91+1 =192

2 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंकों के अंत मे 0,2,4,6,8 हो तो वह संख्या 2 से भाज्य होती है
जैसे :- 4350, 4258, 567084

3 से भाजकता का नियम –जिस संख्या के अंकों के योगफल में 3 का पूरा-पूरा भाग चला जाये तो वह संख्या 3 से भाज्य होती है

जैसे:- 85761, 8+5+7+6+1 =27, यहाँ 27, 3 से विभाजित है तो यह संख्या भी भाज्य होगी।

Exml- 701
7+0+1=9
701 divided by 3

111
1+1+1=3
111divide by 3

4 से भाजकता का नियम – जिस संख्या के इकाई व दहाई के अंकों में 4 का पूरा-पूरा भाग चला जाये तो वह संख्या 4 से भाज्य होगी ।

जैसे :- 15396, यहाँ 96, 4 से पूरी तरह भाज्य है तो यह संख्या भी 4 से पूरी तरह भाज्य होगी।

Ep-2016–> last digit 4 se divide
1700–> divided by 4

5 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंत मे 0 या 5 हो तो वह संख्या 5 से पूरी तरह विभाजित होगी ।

जैसे:- 85790, 12625

6 से भाजकता का नियम- जो संख्या 2 व 3 से पूरी तरह विभाजित हो तो वह संख्या 6 से भी विभाजित होगी।

जैसे:- 5730, 85944

7 से भाजकता का नियम- दी गयी संख्या के इकाई अंक को दोगुना करके शेष सँख्या में से घटाते है यदि शेष संख्या 7 से कट जाये तो वह 7 से भाज्य हो जाएगी । अन्यथा नही

जैसे:-16807, में से 7 को दोगुना 14 घटाने पर 1680-7×2=1666, 166-6×2=154, 15-4×2=7 अतः यह संख्या 7 से पूर्णतः भाज्य है।

यदि कोई संख्या समान अंको की पुनरावृत्ति से 6 अंको तक हो तोवह संख्या 7 से विभाजित होगी। जैसे- 444444

8 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के इकाई,दहाई व सैकड़ा के अंको में 8 का पूरा-पूरा भाग चला जाए तो वह संख्या 8 से विभाजित होगी।

जैसे:-73584 में 584, 8 से विभाजित है तो यह संख्या भी 8 से विभाजित होगी।

9 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंको के योग में 9 से पूरा-पूरा भाग चला जाए तो वह संख्या 9 से भाज्य होगी ।

जैसे:-47691, 4+7+6+9+1=27
27, 9 से भाज्य है तो यह संख्या भी 9 से भाज्य होगी।

11 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के सम स्थानों के अंको और विषम स्थानों के अंको का अंतर 0 या 11 से विभाज्य हो तो वह संख्या 11 से विभाजित होगी।

जैसे:-95744 (9+7+4)-(5+4)=20-9=11
इनका अंतर 11 से भाज्य है तो यह संख्या भी 11 से भाज्य होगी।

Note:-यदि कोई संख्या 6 बार एक ही अंक की पुनावृत्ति से बनी हो तो वह संख्या 3, 7, 11, 13 व 37 से पूर्णतः विभाजित होती है।

यह बहुत ज्यादा बेसिक है ज्यादातर यही गलती करते हैं और आगे चलकर यही गलतियां उन्हें मैथ में कमजोर कर देती हैं

-1×-1×-1×-1= 1 सम
-1×-1×-1= -1 विषम
-1/-1= 1 सम
-1×-1/-1= -1 विषम

भाग और गुणा की संक्रियाओं में केवल चिन्हों को गिन लेने से परिणामी चिन्ह ज्ञात हो जाता है
Important Questions –

1. तीन अंको की कितनी संख्या है संभव है

1. 200
2. 500
3. 999
4. 900

Answer – 900

ट्रिक

तीन अंको की कुल संख्या = तीन अंको की सबसे बड़ी संख्या- दो अंको की सबसे बड़ी संख्या

ऐसे ही आप कितने भी अंकों की कुल संख्या निकाल सकते हो जैसे यदि 5 की निकालने को पूछना है तो आप 5 अंको की सबसे बड़ी संख्या – उससे नीचे चार अंको की सबसे बड़ी संख्या को घटा देना है

2. एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल क्या होता है
1. धन पूर्णांक
2. अपरिमेय संख्या
3. भाज्य संख्या
4. परिमेय संख्या

Answer – अपरिमेय संख्या 

एक परिमेय संख्या और एक परिमेय संख्या का गुणनफल हमेशा अपरिमेय संख्या होता है

जैसे- 2/3 x √3 = 2/ √3
दी गई संख्या में अंको का जातीय मान (local value)-

किसी दी गई संख्या में किसी अंक का जातीय मान उसका अपना मान होता है चाहे वह किसी भी स्थान पर क्यों ना हो

जैसे संख्या 63548 में 3 का जातीय मान 3 .है, 6 का जातीय मान 6 है

दी गई संख्या में अंकों का स्थानीय मान ( Place value ) – 

किसी दी गई संख्या में

● इकाई अंक का स्थानीय मान= ( इकाई अंक ) × 1
● दहाई अंक का स्थानीय मान= ( दहाई अंक ) × 10
● सैकड़े के अंक का स्थानीय मान =सैकड़े का अंक x 100

उदाहरण- संख्या 32567809 में निम्न अंको के स्थानीय मान लिखिए

    3
    5
    7
    8
    0

【१】 3 का स्थानीय मान= 3 × 10000000=30000000

【२】 5 का स्थानीय मान =5 x 100000= 500000
【३】 7 का स्थानीय मान =7 x 1000= 7000
【४】8 का स्थानीय मान= 8 x 100= 800
【५】0 का स्थानीय मान =0 × 10 = 0

उदाहरण -संख्या 536487 में निम्न अंकों के जातीय मान लिखिए
【क】5
【ख】4
【ग】8

5 का जातीय मान= 5
4 का जातीय मान =4
8 का जातीय मान= 8
Example – 

प्रश्न-1 संख्या 1.235 जिनमे 35 के ऊपर बार का चिन्ह है को p/q के रूप में व्यक्त कीजिये जहाँ p, q पूर्णाक तथा q बराबर नही है 0 के।
A- 1223/999
B- 1233/999
C- 1235/990
D- 1223/990 ✔

प्रश्न-2  4 की घात A=5
5 की घात B=6
6 की घात C=7
7 की घात D=8 हो तो

A×B×C×D=?
A-1
B-1.5 ✔
C-2
D-2.5

प्रश्न-3 51+52+53+———-+100=?
A-2525
B-2975
C-3225
D-3775 ✔

प्रश्न-4 867943 में स्थानीय तथा जातीय मान में अंतर-?
A-943
B-7936
C-6993 ✔
D-none

प्रश्न-5 यदि n एक धनात्मक पूर्णांक है तो 3 की घात 4n–4 की घात 3n सदैव निम्नलिखित में से किस संख्या से पूर्णतया विभाजित होगा?
A-7
B-17 ✔
C-112
D-145


नियम- जिस संख्या के अंकों के अंत मे 0,2,4,6,8 हो तो वह संख्या 2 से भाज्य होती है
जैसे :- 4350, 4258, 567084

3 से भाजकता का नियम– जिस संख्या के अंकों के योगफल में 3 का पूरा-पूरा भाग चला जाये तो वह संख्या 3 से भाज्य होती है

जैसे:- 85761, 8+5+7+6+1 =27, यहाँ 27, 3 से विभाजित है तो यह संख्या भी भाज्य होगी।

Exml- 701
7+0+1=9
701 divided by 3

111
1+1+1=3
111divide by 3

4 से भाजकता का नियम – जिस संख्या के इकाई व दहाई के अंकों में 4 का पूरा-पूरा भाग चला जाये तो वह संख्या 4 से भाज्य होगी ।

जैसे :- 15396, यहाँ 96, 4 से पूरी तरह भाज्य है तो यह संख्या भी 4 से पूरी तरह भाज्य होगी।

Ep-2016–> last digit 4 se divide
1700–> divided by 4

5 से भाजकता का*Number System Formulas, Tricks*
संख्या पद्धति

वह पद्धति जिसमें विभिन्न संख्या और उनके गुणन का अध्ययन किया जाता है। “संख्या पद्धति” कहलाती है। अथवा
किसी भौतिक राशि के परिणामों को बोध कराने के लिए जिस पद्धति का प्रयोग किया जाता हैं।
संख्या पद्धति को उनके गुणो के अनुसार निम्नलिखित भागो में बाटा गया है –

प्राकृतिक संख्या (Natural Number):- ऐसी संख्याएँ जो वस्तुओं के गिनने के काम आती है उन्हें प्राकृतिक संख्या कहते हैं प्राकृतिक संख्या को N प्रकट करते हैं। 0 प्राकृतिक संख्या नहीं होती है 

उदाहरण में- N = { 1, 2, 3, 4, 5 ………… ∞ }

पूर्ण संख्याऐं ( Whole Numbers ) :- यदि प्राकृतिक संख्या में 0 को शामिल कर लिया जाय तो जो संख्याएँ प्राप्त होती है वे संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ होती है पूर्ण संख्या को W से प्रकट करते हैं।

जैसे-: 0, 1, 2, 3, 4 ….. ∞

नोट:- सभी पूर्ण संख्याएं, धनात्मक पूर्णांक, परिमेय एवं वास्तविक होती है। सभी प्राकृतिक संख्याएं पूर्ण संख्या है, लेकिन सभी पूर्ण संख्या प्राकृतिक संख्या नहीं है। जैसे-: 0 

पूर्णांक संख्याएँ ( Integers Number ):- प्राकृतिक संख्या, शुन्य, तथा ऋणात्मक संख्याओं के समुह को ही पूर्णांक संख्याएँ कहते है पूर्णांक संख्याओं को I अथवा Z से प्रकट करते हैं।
उदाहरण में- Z = {∞ …..….-4,-3,-2,-1,0,1,2,3,4,…………∞ }

वास्तविक (Real no.)-  दशमलव भिन्न,ऋणात्मक ,धनात्मक वर्गमूल ,मिश्र सभी वास्तविक संख्याएं हैं
3/4,1/2,-17,8.7

Exception- अवास्तविक=
-1/0,√-l

सम संख्याऐं ( Even numbers ) – दो से विभाजित होने वाली प्राकृतिक संख्या “सम संख्याऐं” कहलाती है। सम संख्याओं को E से प्रकट करते है।

जैसे-: 2, 4, 6, 8…….∞

विषम संख्याऐं ( Odd numbers ) – वे प्राकृतिक संख्या जो 2 से विभाजित नहीं होती हो “विषम संख्याएं” कहलाती है।  विषम संख्याओं को O से प्रकट करते है।

जैसे:-1, 3, 5……. ∞ 

भाज्य संख्या ( Co-Prime Numbers ) – ऐसी प्राकृतिक संख्या जो 1 या अपने को छोड़कर अन्य संख्या से विभाजित हो, “भाज्य संख्या” कहलाती है। जैसे:- 4, 6, 9 ……

अभाज्य संख्या ( Prime Numbers or Composite Number) – वे प्राकृतिक संख्या जो केवल 1 या अपने आप से विभाजित हो सके,अभाज्य संख्याएं कहलाती है।

जैसे:-2, 3, 5, 7 …..

परिमेंय संख्याएँ ( Rational Number ):- ऐसी संख्याएँ जो p/q के रुप में होती हैं जहाँ p और q पूर्णांक संख्याएँ है और q≠0 है इसका मतलब यह है कि q का मान 0 के बराबर नही होगा । परिमेय संख्याओं को Q से प्रकट करते है।

जैसे- 5/7, 8/9, 4/7, 0, 7/9 इत्यादि

अपरिमेंय संख्याएँ ( Irrational Number ):- परिमेय संख्याओं को छोड़कर जितनी संख्याएँ होती है, अपरिमेय सख्याएँ होती है ।

जैसे:- √2, √3, -√2, -√3, √5 , π , √7 …… इत्यादि

वास्तविक संख्याएँ ( Real Number ):- परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं के समुच्चय को ही वास्तविक संख्याएँ कहा जाता है।

 जैसे:- 2/3, 8/9, 7/10, 0, √2, √3, -√2, -√3, √5 , π , √7 …… इत्यादि

दशमलव भिन्न (Decimal Fraction):- ऐसी भिन्नात्मक संख्याएँ जिनका हर 10 हो या 10 की घात हो उसे दशमलव भिन्न कहते हैं ।

जैसे: -7/10, 17/100, 11/1000, 3/10000, …… इत्यादि

अत्रिभाज्य संख्याएँ ( Prime Triplet Number):- वे तीन प्राकृतिक संख्याएँ जिनका महत्तम समापवर्तक (H.C.F) 1 हो, अत्रिभाज्य संख्याएँ कहलाती है ।

जैसे:- 8 , 9 तथा 25 अत्रिभाज्य संख्याएँ है

100 तक की अभाज्य संख्याएं

2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89, 97= कुल 25 संख्याएं

Note –

    1 न तो भाज्य संख्या है, और न ही अभाज्य संख्या।
    2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है
    2 एक मात्र ऐसी सम संख्या है,जो रूढ़ संख्या भी है।
    3 सबसे छोटी विषम अभाज्य संख्या है।
    4 सबसे छोटी भाज्य संख्या है।
    9 सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या है।
    1 से 100 तक कुल अभाज्य संख्या-25
    1 से 50 तक कुल अभाज्य संख्या-15
    1 से 25 तक कुल अभाज्य संख्या-9
    25 से 50 तक कुल अभाज्य संख्या-6
    50 से 100 तक कुल अभाज्य संख्या-10
    अंक 0 से 9 तक होते हैं अतः अंको की संख्या 10 होती है
     संख्या 1 से शुरु होती है संख्या अनंत होती है
    एक अंकीय संख्या 9 होती है
    दो अंकीय संख्या 90 होती है
    तीन अंकीय संख्या 900 होती हैं
    चार अंकीय संख्या 9000 होती हैं

इसी प्रकार … 

    1 से 100 तक की संख्याओ में शून्य के अंक 11 होते हैं
    1 से 100 तक की संख्याओ में एक के अंक 21होते हैं
    1 से 100 तक की संख्याओ में 2 से 9 तक प्रत्येक अंक 20 बार आते है
    1 से 100 तक की संख्याओ में कुल अंक 192 होते हैं

कैसे :-

1 से 100 तक इकाई अंक = 100
1 से 100 तक दहाई अंक = 91
1 से 100 तक सैकड़ा के अंक = 1

Total = 100+ 91+1 =192

2 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंकों के अंत मे 0,2,4,6,8 हो तो वह संख्या 2 से भाज्य होती है
जैसे :- 4350, 4258, 567084

3 से भाजकता का नियम –जिस संख्या के अंकों के योगफल में 3 का पूरा-पूरा भाग चला जाये तो वह संख्या 3 से भाज्य होती है

जैसे:- 85761, 8+5+7+6+1 =27, यहाँ 27, 3 से विभाजित है तो यह संख्या भी भाज्य होगी।

Exml- 701
7+0+1=9
701 divided by 3

111
1+1+1=3
111divide by 3

4 से भाजकता का नियम – जिस संख्या के इकाई व दहाई के अंकों में 4 का पूरा-पूरा भाग चला जाये तो वह संख्या 4 से भाज्य होगी ।

जैसे :- 15396, यहाँ 96, 4 से पूरी तरह भाज्य है तो यह संख्या भी 4 से पूरी तरह भाज्य होगी।

Ep-2016–> last digit 4 se divide
1700–> divided by 4

5 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंत मे 0 या 5 हो तो वह संख्या 5 से पूरी तरह विभाजित होगी ।

जैसे:- 85790, 12625

6 से भाजकता का नियम- जो संख्या 2 व 3 से पूरी तरह विभाजित हो तो वह संख्या 6 से भी विभाजित होगी।

जैसे:- 5730, 85944

7 से भाजकता का नियम- दी गयी संख्या के इकाई अंक को दोगुना करके शेष सँख्या में से घटाते है यदि शेष संख्या 7 से कट जाये तो वह 7 से भाज्य हो जाएगी । अन्यथा नही

जैसे:-16807, में से 7 को दोगुना 14 घटाने पर 1680-7×2=1666, 166-6×2=154, 15-4×2=7 अतः यह संख्या 7 से पूर्णतः भाज्य है।

यदि कोई संख्या समान अंको की पुनरावृत्ति से 6 अंको तक हो तोवह संख्या 7 से विभाजित होगी। जैसे- 444444

8 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के इकाई,दहाई व सैकड़ा के अंको में 8 का पूरा-पूरा भाग चला जाए तो वह संख्या 8 से विभाजित होगी।

जैसे:-73584 में 584, 8 से विभाजित है तो यह संख्या भी 8 से विभाजित होगी।

9 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंको के योग में 9 से पूरा-पूरा भाग चला जाए तो वह संख्या 9 से भाज्य होगी ।

जैसे:-47691, 4+7+6+9+1=27
27, 9 से भाज्य है तो यह संख्या भी 9 से भाज्य होगी।

11 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के सम स्थानों के अंको और विषम स्थानों के अंको का अंतर 0 या 11 से विभाज्य हो तो वह संख्या 11 से विभाजित होगी।

जैसे:-95744 (9+7+4)-(5+4)=20-9=11
इनका अंतर 11 से भाज्य है तो यह संख्या भी 11 से भाज्य होगी।

Note:-यदि कोई संख्या 6 बार एक ही अंक की पुनावृत्ति से बनी हो तो वह संख्या 3, 7, 11, 13 व 37 से पूर्णतः विभाजित होती है।

यह बहुत ज्यादा बेसिक है ज्यादातर यही गलती करते हैं और आगे चलकर यही गलतियां उन्हें मैथ में कमजोर कर देती हैं

-1×-1×-1×-1= 1 सम
-1×-1×-1= -1 विषम
-1/-1= 1 सम
-1×-1/-1= -1 विषम

भाग और गुणा की संक्रियाओं में केवल चिन्हों को गिन लेने से परिणामी चिन्ह ज्ञात हो जाता है
Important Questions –

1. तीन अंको की कितनी संख्या है संभव है

1. 200
2. 500
3. 999
4. 900

Answer – 900

ट्रिक

तीन अंको की कुल संख्या = तीन अंको की सबसे बड़ी संख्या- दो अंको की सबसे बड़ी संख्या

ऐसे ही आप कितने भी अंकों की कुल संख्या निकाल सकते हो जैसे यदि 5 की निकालने को पूछना है तो आप 5 अंको की सबसे बड़ी संख्या – उससे नीचे चार अंको की सबसे बड़ी संख्या को घटा देना है

2. एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल क्या होता है
1. धन पूर्णांक
2. अपरिमेय संख्या
3. भाज्य संख्या
4. परिमेय संख्या

Answer – अपरिमेय संख्या 

एक परिमेय संख्या और एक परिमेय संख्या का गुणनफल हमेशा अपरिमेय संख्या होता है

जैसे- 2/3 x √3 = 2/ √3
दी गई संख्या में अंको का जातीय मान (local value)-

किसी दी गई संख्या में किसी अंक का जातीय मान उसका अपना मान होता है चाहे वह किसी भी स्थान पर क्यों ना हो

जैसे संख्या 63548 में 3 का जातीय मान 3 .है, 6 का जातीय मान 6 है

दी गई संख्या में अंकों का स्थानीय मान ( Place value ) – 

किसी दी गई संख्या में

● इकाई अंक का स्थानीय मान= ( इकाई अंक ) × 1
● दहाई अंक का स्थानीय मान= ( दहाई अंक ) × 10
● सैकड़े के अंक का स्थानीय मान =सैकड़े का अंक x 100

उदाहरण- संख्या 32567809 में निम्न अंको के स्थानीय मान लिखिए

    3
    5
    7
    8
    0

【१】 3 का स्थानीय मान= 3 × 10000000=30000000

【२】 5 का स्थानीय मान =5 x 100000= 500000
【३】 7 का स्थानीय मान =7 x 1000= 7000
【४】8 का स्थानीय मान= 8 x 100= 800
【५】0 का स्थानीय मान =0 × 10 = 0

उदाहरण -संख्या 536487 में निम्न अंकों के जातीय मान लिखिए
【क】5
【ख】4
【ग】8

5 का जातीय मान= 5
4 का जातीय मान =4
8 का जातीय मान= 8
Example – 

प्रश्न-1 संख्या 1.235 जिनमे 35 के ऊपर बार का चिन्ह है को p/q के रूप में व्यक्त कीजिये जहाँ p, q पूर्णाक तथा q बराबर नही है 0 के।
A- 1223/999
B- 1233/999
C- 1235/990
D- 1223/990 ✔

प्रश्न-2  4 की घात A=5
5 की घात B=6
6 की घात C=7
7 की घात D=8 हो तो

A×B×C×D=?
A-1
B-1.5 ✔
C-2
D-2.5

प्रश्न-3 51+52+53+———-+100=?
A-2525
B-2975
C-3225
D-3775 ✔

प्रश्न-4 867943 में स्थानीय तथा जातीय मान में अंतर-?
A-943
B-7936
C-6993 ✔
D-none

प्रश्न-5 यदि n एक धनात्मक पूर्णांक है तो 3 की घात 4n–4 की घात 3n सदैव निम्नलिखित में से किस संख्या से पूर्णतया विभाजित होगा?
A-7
B-17 ✔
C-112
D-145


*नियम- जिस संख्या के अंत मे 0 या 5 हो तो वह संख्या 5 से पूरी तरह विभाजित होगी ।

जैसे:- 85790, 12625

6 से भाजकता का नियम- जो संख्या 2 व 3 से पूरी तरह विभाजित हो तो वह संख्या 6 से भी विभाजित होगी।

जैसे:- 5730, 85944

7 से भाजकता का नियम- दी गयी संख्या के इकाई अंक को दोगुना करके शेष सँख्या में से घटाते है यदि शेष संख्या 7 से कट जाये तो वह 7 से भाज्य हो जाएगी । अन्यथा नही

जैसे:-16807, में से 7 को दोगुना 14 घटाने पर 1680-7×2=1666, 166-6×2=154, 15-4×2=7 अतः यह संख्या 7 से पूर्णतः भाज्य है।

यदि कोई संख्या समान अंको की पुनरावृत्ति से 6 अंको तक हो तोवह संख्या 7 से विभाजित होगी। जैसे- 444444

8 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के इकाई,दहाई व सैकड़ा के अंको में 8 का पूरा-पूरा भाग चला जाए तो वह संख्या 8 से विभाजित होगी।

जैसे:-73584 में 584, 8 से विभाजित है तो यह संख्या भी 8 से विभाजित होगी।

9 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के अंको के योग में 9 से पूरा-पूरा भाग चला जाए तो वह संख्या 9 से भाज्य होगी ।

जैसे:-47691, 4+7+6+9+1=27
27, 9 से भाज्य है तो यह संख्या भी 9 से भाज्य होगी।

11 से भाजकता का नियम- जिस संख्या के सम स्थानों के अंको और विषम स्थानों के अंको का अंतर 0 या 11 से विभाज्य हो तो वह संख्या 11 से विभाजित होगी।

जैसे:-95744 (9+7+4)-(5+4)=20-9=11
इनका अंतर 11 से भाज्य है तो यह संख्या भी 11 से भाज्य होगी।

Note:-यदि कोई संख्या 6 बार एक ही अंक की पुनावृत्ति से बनी हो तो वह संख्या 3, 7, 11, 13 व 37 से पूर्णतः विभाजित होती है।

यह बहुत ज्यादा बेसिक है ज्यादातर यही गलती करते हैं और आगे चलकर यही गलतियां उन्हें मैथ में कमजोर कर देती हैं

-1×-1×-1×-1= 1 सम
-1×-1×-1= -1 विषम
-1/-1= 1 सम
-1×-1/-1= -1 विषम

भाग और गुणा की संक्रियाओं में केवल चिन्हों को गिन लेने से परिणामी चिन्ह ज्ञात हो जाता है
Important Questions –

1. तीन अंको की कितनी संख्या है संभव है

1. 200
2. 500
3. 999
4. 900

Answer – 900

ट्रिक

तीन अंको की कुल संख्या = तीन अंको की सबसे बड़ी संख्या- दो अंको की सबसे बड़ी संख्या

ऐसे ही आप कितने भी अंकों की कुल संख्या निकाल सकते हो जैसे यदि 5 की निकालने को पूछना है तो आप 5 अंको की सबसे बड़ी संख्या – उससे नीचे चार अंको की सबसे बड़ी संख्या को घटा देना है

2. एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल क्या होता है
1. धन पूर्णांक
2. अपरिमेय संख्या
3. भाज्य संख्या
4. परिमेय संख्या

Answer – अपरिमेय संख्या 

एक परिमेय संख्या और एक परिमेय संख्या का गुणनफल हमेशा अपरिमेय संख्या होता है

जैसे- 2/3 x √3 = 2/ √3
दी गई संख्या में अंको का जातीय मान (local value)-

किसी दी गई संख्या में किसी अंक का जातीय मान उसका अपना मान होता है चाहे वह किसी भी स्थान पर क्यों ना हो

जैसे संख्या 63548 में 3 का जातीय मान 3 .है, 6 का जातीय मान 6 है

दी गई संख्या में अंकों का स्थानीय मान ( Place value ) – 

किसी दी गई संख्या में

● इकाई अंक का स्थानीय मान= ( इकाई अंक ) × 1
● दहाई अंक का स्थानीय मान= ( दहाई अंक ) × 10
● सैकड़े के अंक का स्थानीय मान =सैकड़े का अंक x 100

उदाहरण- संख्या 32567809 में निम्न अंको के स्थानीय मान लिखिए

    3
    5
    7
    8
    0

【१】 3 का स्थानीय मान= 3 × 10000000=30000000

【२】 5 का स्थानीय मान =5 x 100000= 500000
【३】 7 का स्थानीय मान =7 x 1000= 7000
【४】8 का स्थानीय मान= 8 x 100= 800
【५】0 का स्थानीय मान =0 × 10 = 0

उदाहरण -संख्या 536487 में निम्न अंकों के जातीय मान लिखिए
【क】5
【ख】4
【ग】8

5 का जातीय मान= 5
4 का जातीय मान =4
8 का जातीय मान= 8
Example – 

प्रश्न-1 संख्या 1.235 जिनमे 35 के ऊपर बार का चिन्ह है को p/q के रूप में व्यक्त कीजिये जहाँ p, q पूर्णाक तथा q बराबर नही है 0 के।
A- 1223/999
B- 1233/999
C- 1235/990
D- 1223/990 ✔

प्रश्न-2  4 की घात A=5
5 की घात B=6
6 की घात C=7
7 की घात D=8 हो तो

A×B×C×D=?
A-1
B-1.5 ✔
C-2
D-2.5

प्रश्न-3 51+52+53+———-+100=?
A-2525
B-2975
C-3225
D-3775 ✔

प्रश्न-4 867943 में स्थानीय तथा जातीय मान में अंतर-?
A-943
B-7936
C-6993 ✔
D-none

प्रश्न-5 यदि n एक धनात्मक पूर्णांक है तो 3 की घात 4n–4 की घात 3n सदैव निम्नलिखित में से किस संख्या से पूर्णतया विभाजित होगा?
A-7
B-17 ✔
C-112
D-145

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समास और उसके प्रकार [compound and it's type]


समास

समास-दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नए शब्द बनाने की क्रिया को समास कहते हैं !

सामासिक पद को विखण्डित करने की क्रिया को विग्रह कहते हैं !

समास के छ: भेद हैं -

1- अव्ययीभाव समास - 

जिस समास में पहला पद प्रधान होता है तथा समस्त पद अव्यय का काम करता है , उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं !जैसे - 

      ( सामासिक पद )                     ( विग्रह )

1.      यथावधि                          अवधि के अनुसार    

2.      आजन्म                           जन्म पर्यन्त 

3.      प्रतिदिन                           दिन -दिन

4.      यथाक्रम                           क्रम के अनुसार

5.      भरपेट                              पेट भरकर

2- तत्पुरुष समास -

इस समास में दूसरा पद प्रधान होता है तथा विभक्ति चिन्हों का लोप हो जाता है !  तत्पुरुष समास के छ: उपभेद विभक्तियों के आधार पर किए गए हैं -

1. कर्म तत्पुरुष

2. करण तत्पुरुष

3. सम्प्रदान तत्पुरुष

4. अपादान तत्पुरुष

5. सम्बन्ध तत्पुरुष

6. अधिकरण तत्पुरुष

उदाहरण इस प्रकार हैं - 

  (सामासिक पद )      (विग्रह )                   ( समास )
1. कोशकार     कोश को करने वाला       कर्म तत्पुरुष
2. मदमाता      मद से माता                   करण तत्पुरुष
3. मार्गव्यय     मार्ग के लिए व्यय            सम्प्रदान तत्पुरुष
4. भयभीत     भय से भीत                    अपादान तत्पुरुष
5. दीनानाथ    दीनों के नाथ                   सम्बन्ध तत्पुरुष
6. आपबीती   अपने पर बीती               अधिकरण तत्पुरुष                       

3- कर्मधारय समास -  

जिस समास के दोनों पदों में विशेष्य - विशेषण या उपमेय - उपमान सम्बन्ध हो तथा दोनों पदों में एक ही कारक की विभक्ति आये उसे कर्मधारय समास कहते हैं !  जैसे

       ( सामासिक पद )                 ( विग्रह )
1.  नीलकमल                  नीला है जो कमल
2.  पीताम्बर                    पीत है जो अम्बर
3.  भलामानस                 भला है जो मानस
4.  गुरुदेव                       गुरु रूपी देव
5. लौहपुरुष      लौह के समान (कठोर एवं शक्तिशाली) पुरुष

4- बहुब्रीहि समास -

अन्य पद प्रधान समास को बहुब्रीहि समास कहते हैं !इसमें दोनों पद किसी अन्य अर्थ को व्यक्त करते हैं और वे किसी अन्य संज्ञा के विशेषण की भांति कार्य करते हैं ! जैसे -

       ( सामासिक पद )               ( विग्रह )
1.      दशानन            दश हैं आनन जिसके  (रावण)
2.      पंचानन            पांच हैं मुख जिनके  (शंकर जी)
3.      गिरिधर            गिरि को धारण करने वाले (श्री कृष्ण)
4.      चतुर्भुज           चार हैं भुजायें जिनके  (विष्णु)
5.      गजानन           गज के समान मुख वाले (गणेश जी)

5-  द्विगु समास -

इस समास का पहला पद संख्यावाचक होता है और सम्पूर्ण पद समूह का बोध कराता है ! जैसे -      

   ( सामासिक पद )                ( विग्रह )
1. पंचवटी                  पांच वट वृक्षों का समूह
2. चौराहा                  चार रास्तों का समाहार
3. दुसूती                    दो सूतों का समूह
4. पंचतत्व                 पांच तत्वों का समूह
5. त्रिवेणी    तीन नदियों (गंगा, यमुना, सरस्वती) का समाहार

6- द्वन्द्व समास -

इस समास में दो पद होते हैं तथा दोनों पदों की प्रधानता होती है ! इनका विग्रह करने के लिए (और, एवं, तथा, या, अथवा) शब्दों का प्रयोग किया जाता है !
जैसे -
           (सामासिक पद)                       (विग्रह)
1.         हानि - लाभ                        हानि या लाभ
2.         नर - नारी                           नर और नारी
3.         लेन - देन                           लेना और देना
4.         भला - बुरा                          भला या बुरा
5.         हरिशंकर                            विष्णु और शंकर


समास शॉर्टट्रिक्स

समास का तात्पर्य है “संक्षिप्तीकरण”  दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास (Samas) कहते हैं।

उदाहरण
रसोईघर – रसोई के लिए घर।
नीलगाय – नीले रंग की गाय।

समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द (Samasi Shabd) कहलाता है। इसे हम समस्त पद (Samast Pad) भी कहते हैं।

समास के भेद:-

 हिंदी में समास के छ: भेद हैं :
(1) अव्ययीभाव समास  
(2) तत्पुरुष समास
(3) द्विगु समास
(4) द्वंद्व समास
(5) कर्मधारय समास
(6) बहुव्रीहि समास

*अव्ययीभाव समास*


इस समास में पहला पद (पूर्व पद) प्रधान होता है और पूरा पद अव्यय होता है ,इसमें पहला पद उपसर्ग होता है जैसे अ,आ, अनु, प्रति, हर, भर, नि, निर, यथा, यावत आदि उपसर्ग शब्द का बोध होता है

नोट : अव्ययीभाव समास में उपसर्ग होता है

उदाहरण:
(आजन्म) – जन्म पर्यन्त
(यथावधि) – अवधि के अनुसार
(यथाक्रम) – क्रम के अनुसार
(बेकसूर)  –  बिना कसूर के
(निडर)    –  बिना डर के

*तत्पुरुष समास*

इस समास में दूसरा पद (उत्तर पद / अंतिम पद) प्रधान होता है इसमें कर्ता और संबोधन कारक को छोड़कर शेष छ: कारक चिन्हों का प्रयोग होता है
जैसे – कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक

नोट : तत्पुरुष समास में कारक चिन्हों का प्रयोग होता है

उदाहरण
(विद्यालय) – विद्या के लिए आलय
(राजपुत्र) – राजा का पुत्र
(मुंहतोड़) – मुंह को तोड़ने वाला
(चिड़ीमार) – चिड़िया को मारने वाला
(जन्मांध) – जन्म से अँधा

*द्विगु समास*

द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है विग्रह करने पर समूह का बोध होता है

नोट : द्विगु समास में संख्या का बोध होता है

उदाहरण
(त्रिलोक) – तीनो लोकों का समाहार
(नवरात्र) – नौ रात्रियों का समूह
(अठन्नी) – आठ आनो का समूह
(दुसूती) – दो सुतों का समूह
(पंचतत्व) – पांच तत्वों का समूह

*द्वंद्व समास*

इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह करने पर बीच में ‘और’/ ‘या’ का बोध होता है

नोट : द्वंद्व समास में योजक चिन्ह (-) और ‘या’का बोध होता है

*उदाहरण*
(पाप-पुण्य) – पाप और पुण्य
(सीता-राम) – सीता और राम
(ऊँच-नीच) – ऊँच और नीच
(खरा-खोटा) – खरा या खोटा
(अन्न-जल) – अन्न और जल

*कर्मधारय समास*


इसमें समस्त पद सामान रूप से प्रधान होता है इसके लिंग, वचन भी सामान होते हैं इस समास में पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है विग्रह करने पर कोई नया शब्द नहीं बनता

*नोट :* कर्मधारय समास में व्यक्ति, वस्तु आदि की विशेषता का बोध होता है

*उदाहरण*
(चन्द्रमुख) – चन्द्रमा के सामान मुख वाला –विशेषता
(दहीवड़ा) – दही में डूबा बड़ा – विशेषता
(गुरुदेव) – गुरु रूपी देव – विशेषता
(चरण कमल) – कमल के समान चरण – विशेषता
(नील गगन) – नीला है जो असमान – विशेषता


*बहुव्रीहि समास*


इस समास में कोई भी पद प्रधान न होकर अन्य पद प्रधान होता है विग्रह करने पर नया शब्द निकलता है पहला पद विशेषण नहीं होता है विग्रह करने पर समूह का बोध भी नहीं होता है

*नोट :* बहुव्रीहि समास के अंतर्गत शब्द का विग्रह करने पर नया शब्द बनता है या नया नाम सामने आता है

*उदाहरण*
(त्रिनेत्र) – भगवान शिव
(वीणापाणी) – सरस्वती
(श्वेताम्बर) – सरस्वती
गजानन) – भगवान गणेश
(गिरधर) – भगवान श्रीकृष्ण
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भूगोल- पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास [Origin and development of the Earth]


पृथ्वी की उत्पत्ति

पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न दार्शनिकों व वैज्ञानिकों ने अनेक परिकल्पनाएँ प्रस्तुत की हैं। इनमें से एक प्रारंभिक एवं लोकप्रिय मत जर्मन दार्शनिक इमैनुअल कान्ट (Immanuel Kant) का है। 1796 ई० में गणित लाप्लेस (Laplace) ने इसका संशोधन प्रस्तुत किया जो नीहारिका परिकल्पना (Nebular hypothesis) के नाम से जाना जाता है। इस परिकल्पना के अनुसार ग्रहों का निर्माण धीमी गति से घूमते हुए पदार्थों के बादल से हुआ जो कि सूर्य की युवा अवस्था से संबद्ध थे। बाद में 1900 ई. में चेम्बरलेन और मोल्टन (Chamberlain & Moulton) ने कहा कि ब्रह्मांड में एक अन्य भ्रमणशील तारा सूर्य के नजदीक से गुजरा। इसके परिणाम स्वरूप तारे के गुरूत्वाकर्षण से सूर्य सतह से सिगार के आकार का कुछ पदार्थ निकलकर अलग हो गया। यह तारा जब सूर्य से दूर चला गया तो सूर्य-सतह से बाहर निकला हुआ यह पदार्थ सूर्य के चारों तरफ घूमने लगा और यही धीरे-धीरे संघनित होकर ग्रहों के रूप में परिवर्तित हो गया। पहले सर जेम्स जींस (Sir James Jeans) और बाद में सर हरोल्ड जैफरी (Sir Harold Jeffrey) ने इस मत का समर्थन किया। यद्यपि समय बाद के तर्क सूर्य के साथ एक और साथी तारे के होने की बात मानते हैं। ये तर्क ‘‘दैतारक सिद्धांत" (Binary theories) के नाम से जाने जाते हैं। 1950 ई. में रूस के ऑटो शिमिड (Otto schmidt) व जर्मनी के कार्ल वाइज़ास्कर (Carl weizascar) ने नीहारिका परिकल्पना (Nebular hypothesis) में कुछ संशोधन किया, जिसमें विवरण भिन्न था। उनके विचार से सूर्य एक सौर नीहारिका से घिरा हुआ था जो मुख्यत: हाइड्रोजन हीलीयम और धूलिकणों की बनी थी। इन कणों के घर्षण व टकराने (Collisionसे एक चपटी तश्तरी की आकृति के बादल का निर्माण हुआ और अभिवृद्धि (Accretion) प्रक्रम द्वारा ही ग्रहों का निर्माण हुआ। अंततोगत्वा, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी या अन्य ग्रहों की ही नहीं वरन् पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति संबंधी समस्याओं को समझने का प्रयास किया।

आधुनिक सिद्धांत- ब्रह्मांड की उत्पत्ति--

 आधुनिक समय में ब्रह्मांड की उत्पत्ति संबंधी सर्वमान्य सिद्धांत बिग बैंग सिद्धांत (Big bang theory) है। इसे विस्तरित ब्रज ह्मांड परिकल्पना (Expanding universe hypothesis) भी कहा जाता है। 1920 ई में एडविन हब्बल (Edwin Hubble) ने प्रमाण दिये कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। समय बीतने के साथ आकाशगंगाएँ एक दूसरे से दूर हो रही हैं। आप प्रयोग कर जान सकते हैं कि ब्रह्मांड विस्तार का क्या अर्थ है। एक गुब्बारा लें और उसपर कुछ निशान लगाएँ जिनको आकाशगंगायें मान लें। जब आप इस गुब्बारे को फुलाएँगे गुब्बारे पर लगे ये निशान गुब्बारे के फैलने के साथ-साथ एक दूसरे से दूर जाते प्रतीत होंगे। इसी प्रकार आकाशगंगाओं के बीच की दूरी भी बढ़ रही है और परिणामस्वरूप ब्रह्मांड विस्तारित हो रहा है। यद्यपि आप यह पाएँगे कि गुब्बारे पर लगे चिह्नों के बीच की दूरी के अतिरिक्त, चिह्न स्वयं भी बढ़ रहे हैं। जबकि यह तथ्य के अनुरूप नहीं है। वैज्ञानिक मानते हैं कि आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ रही है, परंतु प्रेक्षण आकाशगंगाओं के विस्तार को नहीं सिद्ध करते। अतगुब्बारे का उदाहरण आशिक रूप से ही मान्य है।
बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार निम्न अवस्थाओं में हुआ है:
origin of  Earth
बिग बैंग 
(i) आरम्भ में वे सभी पदार्थ जिनसे ब्रह्मांड बना है, अति छोटे गोलक (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर स्थित थे। जिसका आयतन अत्यधिक सूक्ष्म एवं तापमान तथा घनत्व अनंत था।
(ii) बिग बैंग की प्रक्रिया में इस अति छोटे गोलक में भीषण विस्फोट हुआ। इस प्रकार की विस्फोट प्रक्रिया से वृहत् विस्तार हुआ। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि बिग बैंग की घटना आज से 13.7 अरब वर्षों पहले हुई थी। ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्तार के कारण कुछ ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गई। विस्फोट (Bang) के बाद एक सैकेड के अल्पांश के अंतर्गत ही वृहत् विस्तार हुआ। इसके बाद विस्तार की गति धीमी पड़ गईबिग बैंग होने के आरंभिक तीन मिनट के अंर्तगत ही पहले परमाणु का निर्माण हुआ।
(iii) बिग बैंग से 3 लाख वर्षों के दौरान, तापमान 4500 केल्विन तक गिर गया और परमाणवीय पदार्थ का निर्माण हुआ। ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया।

ब्रह्मांड के विस्तार का अर्थ है आकाशगंगाओं के बीच की दूरी में विस्तार का होना। हॉयल (Hoyle) ने इसका विकल्प स्थिर अवस्था संकल्पना' (Steady state concept) के नाम से प्रस्तुत किया। इस संकल्पना के अनुसार ब्रह्मांड किसी भी समय में एक ही जैसा रहा है। यद्यपि ब्रह्मांड के विस्तार संबंधी अनेक प्रमाणों के मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय अब ब्रह्मांड विस्तार सिद्धांत के ही पक्षधर हैं।

तारों का निर्माण-

प्रारंभिक ब्रह्मांड में ऊर्जा व पदार्थ का वितरण समान नहीं था। घनत्व में आरंभिक भिन्नता से गुरुत्वाकर्षण बलों में भिन्नता आईजिसके परिणामस्वरूप पदार्थ का एकत्रण हुआ। यही एकत्रण आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना। एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह है। आकाशगंगाओं का विस्तार इतना अधिक होता है कि उनकी दूरी हजारों प्रकाश वर्षों में (Light years) मापी जाती है। एक अकेली आकाशगंगा का व्यास 80 हजार से 1 लाख 50 हजार प्रकाश वर्ष के बीच हो सकता है। एक आकाशगंगा के निर्माण की शुरूआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है जिसे नीहारिका (Nebula) कहा गयाक्रमश: इस बढ़ती हुई नीहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए। ये झुंड बढ़तेबढ़ते घने गैसीय पिंड बनेजिनसे तारों का निर्माण आरंभ हुआ। ऐसा विश्वास किया जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्षों पहले हुआ।

प्रकाश वर्ष (Light year) समय का नहीं वरन् दूरी का माप है। प्रकाश की गति 3 लाख कि0 मी0 प्रति सैकेड है। विचारणीय है कि एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करेगा, वह एक प्रकाश वर्ष होगा। यह 9.461 1012 कि॰मी. के बराबर है। पृथ्वी व सूर्य की औसत दूरी 14 करोड़ 95 लाख 98 हजार किलोमीटर है। प्रकाश वर्ष के संदर्भ में यह प्रकाश वर्ष का केवल 8.311 है।

ग्रहों का निर्माण

ग्रहों के विकास की निम्नलिखित अवस्थाएँ मानी जाती हैं:-
(i) तारे नीहारिका के अंदर गैस के ग्रंथित फ्रेंड हैं। इन गुथत झंडों में गुरुत्वाकर्षण बल से गैसीय बादल में क्रोड का निर्माण हुआ और इस गैसीय क्रोड के चारों तरफ गैस व धूलकणों की घूमती हुई तश्तरी (Rotating disc) विकसित हुई।
(ii) अगली अवस्था में गैसीय बादल का संघनन आरंभ हुआ और क्रोड को ढकने वाला पदार्थ छोटे गोलों के रूप में विकसित हुआ। ये छोटे गोले संसंजन (अणुओं में पारस्परिक आकर्षण) प्रक्रिया द्वारा ग्रहाणुओं (Planetesimals) में विकसित हुए। संघट्ठ्न (Collision) की क्रिया द्वारा बड़े पिंड बनने शुरू हुए और गुरुत्वाकर्षण बल के परिणामस्वरूप ये आपस में जुड़ गए छोटे पिंडों की अधिक संख्या ही ग्रहाणु है।
(iii) अंतिम अवस्था में इन अनेक छोटे ग्रहाणुओं के सहवर्धित होने पर कुछ बड़े पिंड ग्रहों के रूप में बने।

सौरमंडल 

हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह हैं। नीहारिका को सौरमंडल का जनक माना जाता है उसके ध्वस्त होने व क्रोड के बनने की शुरूआत लगभग 5 से .6 अरब वर्षों पहले हुई व ग्रह लगभग .6 से .56 अरब वर्षों पहले बने। हमारे सौरमंडल में सूर्य (तारा), 8 ग्रह, 63 उपग्रह, लाखों छोटे पिंड जैसे क्षुद्र ग्रह (ग्रहों के टुकड़े) (Asteroids), धूमकेतु (Comets) एवं वृहत् मात्रा में धूलिकण व गैस हैं।
इन आठ ग्रहों में बुधशुक्र, पृथ्व व मगल भीतरी ग्रह (Inner planets) कहलाते हैं, क्योंकि ये सूर्य व बुद्रग्रहों की पट्टी के बीच स्थित हैं। अन्य चार ग्रह बाहरी ग्रह (Outer planets) कहलाते हैं। पहले चार ग्रह पार्थिव (Terrestria) ग्रह भी कहे जाते हैं। इसका अर्थ है कि ये ग्रह पृथ्वी की भाँति ही शैलों और धातुओं से बने हैं और अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाले ग्रह हैं। अन्य चार ग्रह गैस से बने विशाल ग्रह या जोवियन (Jovianग्रह कहलाते हैं। जोवियन अर्थ है बृहस्पति (upiter) की तरह का इनमें से अधिकतर पार्थिव ग्रहों से विशाल हैं और हाइड्रोजन व हीलीयम से बना सघन वायुमंडल है। सभी ग्रहों का निर्माण लगभग 46 अरब वर्षों पहले एक ही समय में हुआ। अभी तक प्लूटो को भी एक ग्रह माना जाता था। परन्तु अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी संगठन ने अपनी बैठक (अगस्त 2006) में यह निर्णय लिया कि कुछ समय पहले खोजे गए अन्य खगोलीय पिण्ड (2003 UB313) तथा प्लूटो ‘बोने ग्रह' कह जा सकते हैं। हमारे सौरमंडल से संबंधित कुछ तथ्य सारणीय में दिए गए हैं।
सौरमंडल में आठ ग्रह
सौरमंडल

(i) पार्थिव ग्रह जनक तारे के बहुत समीप बनें जहाँ अत्यधिक तापमान के कारण गैसें संघनित नहीं हो पाई और घनीभूत भी न हो सकीं। जोवियन ग्रहों की रचना अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर हुई।
(ii) सौर वायु सूर्य के नज़दीक ज्यादा शक्तिशाली थी। अतपार्थिव ग्रहों से ज्यादा मात्रा में गैस व धूलकण उड़ा ले गई। सौर पवन इतनी शक्तिशाली न होने के कारण जोवियन ग्रहों से गैसों को नहीं हटा पाई।
(iii) पार्थिव ग्रहों के छोटे होने से इनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी कम रही जिसके परिणामस्वरूप इनसे निकली हुई गैस इनपर रुकी नहीं रह सकी।

चंद्रमा 

चंद्रमा पृथ्वी का अकेला प्राकृतिक उपग्रह है। पृथ्वी की तरह चंद्रमा की उत्पत्ति संबंधी मत प्रस्तुत किए गए हैं। सन् 1838 ई. में, सर जार्ज डार्विन (Sir George Darwin) ने सुझाया कि प्रारंभ में पृथ्वी व चंद्रमा तेजी से घूमते एक ही पिंड थे। यह पूरा पिंड डंबल (बीच से पतला व किनारों से मोटा) की आकृति में परिवर्तित हुआ और अंततोगत्वा टूट गया। उनके अनुसार चंद्रमा का निर्माण उसी पदार्थ से हुआ है जहाँ आज प्रशांत महासागर एक गर्त के रूप में मौजूद है। यद्यपि वतर्मान समय के वैज्ञानिक इनमें से किसी भी व्याख्या को स्वीकार नहीं करते। ऐसा विश्वास किया जाता है कि पृथ्वी के उपग्रह के रूप में चंद्रमा की उत्पत्ति एक बड़े टकराव (Giant impact) का नतीजा है जिसे ‘द बिग स्प्लैट' (The big splat) कहा गया है। ऐसा मानना है कि पृथ्वी के बनने के कुछ समय बाद ही मंगल ग्रह के 1 से 3 गुणा बड़े आकार का पिंड पृथ्वी से टकराया। इस टकराव से पृथ्वी का एक हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में बिखर गया। टकराव से अलग हुआ यह पदार्थ फिर पृथ्वी के कक्ष में घूमने लगा और क्रमश: आज का चंद्रमा बनायह घटना या चंद्रमा की उत्पत्ति लगभग 4.44 अरब वर्षों पहले हुई।

पृथ्वी का उद्धव

क्या आप जानते हैं कि प्रारंभ में पृथ्वी चट्टानी, गर्म और वीरान ग्रह थी, जिसका वायुमंडल विरल था जो हाइड्रोजन व हीलीयम से बना था। यह आज की पृथ्वी के वायुमंडल से बहुत अलग था। अत: कुछ ऐसी घटनाएँ एवं क्रियाएँ अवश्य हुई होंगी जिनके कारण चट्टानी, वीरान और गर्म पृथ्वी एक ऐसे सुंदर ग्रह में परिवर्तित हुई जहाँ बहुत सा पानी, तथा जीवन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हुआ। अगले कुछ भागों में आप पढ़ेंगे कि आज से 460 करोड़ सालों के दौरान इस ग्रह पर जीवन का विकास कैसे हुआ। पृथ्वी की संरचना परतदार है। वायुमंडल के बाहरी छोर से पृथ्वी के क्रांड तक जा पदार्थ हैं वे एक समान नहीं हैं। वायुमंडलीय पदार्थ का घनत्व सबसे कम है। पृथ्वी की सतह से इसके भीतरी भाग तक अनेक मंडल हैं और हर एक भाग के पदार्थ की अलग विशेषताएँ हैं।

स्थलमंडल का विकास

 ग्रहाणु व दूसरे खगोलीय पिंड ज्यादातर एक जैसे ही घने और हल्के पदार्थों के मिश्रण से बने हैं। उल्काओं के अध्ययन से हमें इस बात का पता चलता है। बहुत से ग्रहाणुओं के इकट्ठा होने से ग्रह बनें पृथ्वी की रचना भी
इसी प्रकम के अनुरूप हुई है। जब पदार्थ गुरुत्वबल के कारण संहत हो रहा था, तो उन इकट्ठा होते पिंडों ने पदार्थ को प्रभावित किया। इससे अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न हुई यह क्रिया जारी रही और उत्पन्न ताप से पदार्थ पिघलने/गलने लगा। ऐसा पृथ्वी की उत्पत्ति के दौरान और उत्पत्ति के तुरंत बाद हुआ। अत्यधिक ताप के कारण, पृथ्वी आशिक रूप से द्रव अवस्था में रह गई और तापमान की अधिकता के कारण ही हल्के और भारी घनत्व के मिश्रण वाले पदार्थ घनत्व के अंतर के कारण अलग होना शुरू हो गए। इसी अलगाव से भारी पदार्थ (जैसे लोहा), पृथ्वी के केन्द्र में चले गए और हल्के पदार्थ पृथ्वी की सतह या ऊपरी भाग की तरफ आ गए। समय के साथ यह और ठंडे हुए और ठोस रूप में परिवर्तित होकर छोटे आकार के हो गए। अंततोगत्वा यह पृथ्वी की भूपर्सटी के रूप में विकसित हो गए। हल्के व भारी घनत्व वाले पदार्थों के पृथक होने की इस प्रक्रिया को विभेदन (Differentiation) कहा जाता है। चंद्रमा की उत्पत्ति के दौरान, भीषण संघट्ठ (Giant impact) के कारण, पृथ्वी का तापमान पुनः बढ़ा  ऊर्जा उत्पत्न हुई और यह विभेदन का दूसरा चरण था। विभेदन की इस प्रक्रिया द्वारा पृथ्वी का पदार्थ अनेक  हो गया। पृथ्वी के धरातल से क्रोड़ तक कई परते पाई जाती है। जैसे - पर्पटी (Crust), प्रावार (Mantle), बाह्य क्रोड़ (Outer core) और आंतरिक क्रोड़ (Inner core)।  पृथ्वी के ऊपरी भाग से आंतरिक भाग तक पदार्थ का घनत्व बढ़ता है।
भूवैज्ञानिक काल मापक्रम
भूवैज्ञानिक काल मापक्रम 

वायुमंडल व जलमंडल का विकास

पृथ्वी के वायुमंडल की वर्तमान संरचना में नाइट्रोजन एवं ऑक्सीजन का प्रमुख योगदान है। वायुमंडल की संरचना व संगठन आठवें अध्याय में बतायी गयी है। वर्तमान वायुमंडल के विकास की तीन अवस्थाएँ हैं। इसकी पहली अवस्था में आदिकालिक वायुमंडलीय गैसों का ह्रास है। दूसरी अवस्था में, पृथ्वी के भीतर से निकली भाप एवं जलवाष्प ने वायुमंडल के विकास में सहयोग किया। अंत में वायुमंडल की संरचना को जैव मंडल के प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया (Photosymthesis) ने संशोधित किया। प्रारंभिक वायुमंडल जिसमें हाइड्रोजन व हीलियम की अधिकता थी, सोर पवन के कारण पृथ्वी से दूर हो गया।
ऐसा केवल पृथ्वी पर ही नहीं, वरन् सभी पार्थिव ग्रहों पर हुआ। अर्थात् सभी पार्थिव ग्रहों से, सौर पवन के प्रभाव के कारण, आदिकालिक वायुमंडल या तो दूर धकेल दिया गया या समाप्त हो गया। यह वायुमंडल के विकास की पहली अवस्था थी।
पृथ्वी के ठंडा होने और विभेदन के दौरान पृथ्वी के अंदरूनी भाग से बहुत सी गैसें व जलवाष्प बाहर निकले इसी से आज के वायुमंडल का उद्भव हुआ। आरंभ में वायुमंडल में जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन व अमोनिया अधिक मात्रा में, और स्वतंत्र ऑक्सीजन बहुत कम थी। वह प्रक्रिया जिससे पृथ्वी के भीतरी भाग से गैसें धरती पर आई, इसे गैस उत्सर्जन (Degassing) कहा जाता है। लगातार ज्वालामुखी विस्फोट से वायुमंडल में जलवाष्प व गैस बढ़ने लगी। पृथ्वी के ठंडा होने के साथ-साथ जलवाष्प का संघनन शुरू हो गया। वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाई ऑक्साइड के वर्षा के पानी में घुलने से तापमान में और अधिक गिरावट आई। फलस्वरूप अधिक संघनन व अत्यधिक वर्षा हुई। पृथ्वी के धरातल पर वर्षा का जल गर्गों में इकट्ठा होने लगा, जिससे महासागर बनें। पृथ्वी पर उपस्थित महासागर पृथ्वी की उत्पत्ति से लगभग 50 करोड़ सालों के अंतर्गत बनें। इससे हमें पता चलता है कि महासागर 400 करोड़ साल पुराने हैं। लगभग 380 करोड़ साल पहले जीवन का विकास आरंभ हुआ। यद्यपि लगभग 250 से 300 करोड़ साल पहले प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया विकसित हुई। लंबे समय तक जीवन केवल महासागरों तक सीमित रहा। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा ऑक्सीजन में बढ़ोतरी महासागरों की देन है। धीरे-धीरे महासागर ऑक्सीजन से संतृप्त हो गए और वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा 200 करोड़ वर्ष पूर्व पूर्ण रूप से भर गई।

जीवन की उत्पत्ति

पृथ्वी की उत्पत्ति का अंतिम चरण जीवन की उत्पत्ति व विकास से संबंधित है। निसंदेह पृथ्वी का आरंभिक वायुमंडल जीवन के विकास के लिए अनुकूल नहीं था। आधुनिक वैज्ञानिक, जीवन की उत्पत्ति को एक तरह की रासायनिक प्रतिक्रिया बताते हैं, जिससे पहले जटिल जैव (कार्बनिक) अणु (Complex organic molecules) बने और उनका समूहन हुआ। यह समूहन ऐसा था जो अपने आपको दोहराता था। (पुन: बनने में सक्षम था), और निर्जीव पदार्थ को जीवित तत्व में परिवर्तित कर सका। हमारे ग्रह पर जीवन के चिह्न अलग-अलग समय की चट्टानों में पाए जाने वाले जीवाश्म के रूप में हैं। 300 करोड़ साल पुरानी भूगर्थिक शैलों में पाई जाने वाली सूक्ष्मदर्शी संरचना आज की शैवाल (Blue green algae) की संरचना से मिलती जुलती है। यह कल्पना की जा सकती है कि इससे पहले समय में साधारण संरचना वाली शैवाल रही होगी। यह माना जाता है कि जीवन का विकास लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले आरंभ हुआ।
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भौतिक विज्ञान - सामान्य ज्ञान [PHYSICS - GENERAL KNOWLEDGE]

PHYSICS - GENERAL KNOWLEDGE
भौतिक विज्ञान - सामान्य ज्ञान

भौतिक विज्ञान - सामान्य ज्ञान 

1. कार्य का मात्रक क्या होता है।
    -जूल 
2. प्रकाशवर्ष मात्रक किसका है? 
    -दूरी का
3. ल्यूमन किसका मात्रक है? 
    -ज्योति फ्लक्स का
4. ‘क्यूरी (Curie)' किसकी इकाई का नाम है? 
    -रेडियोएक्टिव धर्मिता
5. पदार्थ के संवेग और वेग के अनुपात से कौन-सी भौतिक राशि प्राप्त की जाती है? 
    -दव्यमान
6. जल में तैरना न्यूटन की गति के किस नियम के कारण सम्भव है? 
    -तृतीय नियम
7. रॉकेट की कार्यप्रणाली किस सिद्धांत पर आधारित होती है?
    - संवेग संरक्षण
8, अश्व यदि एकाएक चलना प्रारम्भ कर दे तो अश्वारोही के गिरने की आशंका का कारण है। 
    -विश्राम जड़त्व
9. कालीन की सफाई के लिए, यदि उसे छड़ी से पीटा जाए, तो उसमें कौन-सा नियम लागू होता है?
    -गति का पहलना नियम
10. समुद्र में प्लवन करते आइसबर्ग का कितना भाग समुद्र की सतह से ऊपर रहता है? 1/10
11. प्रकाश वोल्टीय सेल के प्रयोग से सौर ऊर्जा का रूपान्तरण करने के किसका उत्पादन होता है? 
    -प्रकाशीय ऊर्जा
12. स्वचालित वाहनों में द्रवचालित अंकों का इस्तेमाल वस्तुतकिस नियम का सीधा अनुप्रयोग है? 
    -पास्कल का नियम
13. जब दूध को प्रबल ढंग से मथा जाता है, तो उसमें से क्रीम किस कारण से अलग हो जाती है? 
    -अपकेन्द्री बल
14. जेट इंजन किसके संरक्षण के सिद्धान्त पर काम करता है?
    -रेखिक संवेग के
15. किसी तुल्यकारी उपग्रह की पृथ्वी की सतह से ऊंचाई लगभग कितनी होती है? 
     36,000 km
16. पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का कितना भाग चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के सबसे नजदीक है? 
     1/6
17. वर्षा की गेंद का आकार गोलाकार किस कारण से हो जाता है?  
    -पृष्ठ तनाव
18. कपूर के छोटे-छोटे टुकड़े जल की सतह पर क्यों नाचते हैं? 
    -पृष्ठ तनाव के कारण
19. पानी में लोहे की सूई डूब जाती है लेकिन जहाज तैरता रहता है। यह किस सिद्धान्त पर है?-
    -आर्किमिडीज का सिद्धान्त
20, आर्किमिडीज का नियम किससे सम्बन्धित है? -
    -प्लवन का नियम
21 . गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम का प्रतिपादन किसने किया? 
    -न्यूटन
22. कौन-सा 1 kg द्रव्यमान के पिण्ड पर कार्यशील पृथ्वी के गुरुत्वबल का सही मान है? 
     9.8 N
23. एक हॉर्स पावर (H.P) कितने वाट के बराबर होता है?
    746  वाट 
24. लोहे की सुई पानी की सतह पर किस कारण तैरती रहती है? 
    -पृष्ठ तनाव के कारण
25. एक गेंद को क्षैतिज से कितने कोण पर फेंके कि यह अधिकतम क्षेतिज दूरी तय कर सके?
    -  45॰
26. किसने न्यूटन से पूर्व ही बता दिया था कि सभी वस्तुएँ पृथ्वी की ओर गुरुत्वाकर्षित होती हैं?
    - ब्रह्मगुप्त
27. क्रिकेट की गेंद को किस कोण से मारा जाना चाहिए, ताकि वह अधिकतम दूरी तक जा सके?
    -  क्षेतिज से 45॰ का कोण
28. ऊष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है जिसे कार्य में बदला जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सबसे पहले किसने दिया?
    -  रमफोर्ड
29. किस वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम बर्फ के दो टुकड़ों को आपस में घिसकर पिघला दिया?
    -  डेवी
30. वाष्प इंजन में उबलते हुए जल का तापमान किस कारण से उच्च हो सकता है? 
    - बॉयलर के अंदर उच्च दाब होता है
31. ताप युग्म तापमापी (Thermo Couple Thermometer) किस सिद्धान्त पर आधारित है? 
    - सीबेक के प्रभाव पर
32. पूर्ण विकिरण उत्तापमापी (Total Radiation Pyrometer) किस सिद्धान्त पर आधारित है?
    -  स्टीफन के नियम पर
33. दूर की वस्तुओं जैसे सूर्य आदि का ताप किस तापमापी के द्वारा मापा जाता है? 
    -  पूर्ण विकिरण उत्तापमापी द्वारा
34. कितना तापमान होने पर पाठयांक सेल्सियस और फारेनहाइट तापमापियों में एक ही होंगे?
    -  (-40॰)
35सेल्सियस पैमाने का OC फारेनहाइट स्केल के कितने डिग्री के बराबर होगा? 
     (32०)
36. मानव शरीर का तापमान 986F होता है। सेल्सियस स्केल पर यह कितना होगा? 
     37०C
37, अति लघु समय अन्तरालों को सही-सही मापने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है? 
    - परमाणु घड़ियां
38. एक मनुष्य का तापक्रम 60C है, तो उसका तापक्रम फारेनहाइट में क्या होगा? 
      140०F
40. साइकिल के ट्यूब अधिकांशतया गर्मियों में क्यो फटते हैं? 
    - गर्मी के कारण ट्यूब में भरी हवा का उष्मीय प्रसार होने से ट्यूब फट जाता है।
41. किसी झील की सतह का पानी बस जमने ही वाला है। झील के अधः स्तल में जल का क्या तापमान होगा ? -         4०C
42. ऊष्मा के संचरण की किस विधि में पदार्थ के अणु एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्वयं नहीं जाते?
    - चालन
43. द्रवों तथा गैसों में ऊष्मा का स्थानान्तरण किस विधि द्वारा होता है?
    - संवहन 
44. सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी पर किस प्रकार के संचार माध्यम से आती है?
    -  विकिरण  
45. ऊष्मा के स्थानान्तरण की किस विधि में माध्यम आवश्यक नहीं है?
    -  विकिरण 
46. ऊष्मा संचरण की वह विधि जिसमें माध्यम के कण गति नहीं करते हैं, कौन-सी है?
    - विकिरण 
47. आण्विक संघटन के द्वारा ऊष्मा का सम्प्रेषण क्या कहलाता है?
    -  संवहन 
48. सूर्य विकिरण का कौन-सा भाग सोलर कुकर को गर्म कर देता है? 
    - अवरक्त किरण
49. धूप से बचने के लिय छाते में रंग संयोजन कौन-सा सबसे उचित है? 
    -  ऊपर सफेद नीचे काला
50. किस विधि से ऊष्मा स्थानान्तरण को न्यूनतम करने के लिए थर्मस फ्लास्क की दीवारों पर कलई की जाती है? 
     - विकिरण
51. किसमें सर्वोच्च विशिष्ट ऊष्मा का मान होता है? 
    - जल
52. शुद्ध पदार्थ में कोई अन्य पदार्थ मिला देने पर उसके गलनांक पर क्या प्रभाव पड़ता है? 
    - घट जाता है
53. अपद्रव्यों को मिलाने से गलनांक पर क्या प्रभाव पड़ता है? 
    - घटता है।
54. चावल को पकाने में कहां अधिक समय लगेगा? 
    - माउण्ट एवरेस्ट पर
55. किसी द्रव का उसके क्वथनांक से पूर्व उसके वाष्प में बदलने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
    - वाष्पीकरण 
56. आन्तरिक ऊर्जा की संकल्पना ऊष्मागतिकी के किस नियम से मिलती है? 
    - प्रथम नियम
57. ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम किस अवधारणा की पुष्टि करता है? 
    - ऊर्जा संरक्षण
58. किस बिन्दु पर फारेनहाइट तापक्रम सेन्टीग्रेड तापक्रम का दोगुना होता है।
      160०F
59. किसी वस्तु की विशिष्ट ऊष्मा किस पर निर्भर करती है? 
    - पिण्ड के द्रव्य पर
60. सेल्सियस में माप का कौन-सा तापक्रम 300 K के बराबर है? 
      27०C
61. ब्लैक बॉडी किसकी विकिरण को अवशोषित कर सकती है? 
      -केवल उच्च तरंगदैर्य
62. शीतऋतु के दिनों में हम मौसम किस प्रकार का होने पर ज्यादा ठंड महसूस करते हैं? 
    - साफ मौसम
63. मिट्टी के घड़े में किस क्रिया के कारण जल ठंडा रहता है?
    - वाष्पीकरण 
64. पराश्रव्य तरंगों को सबसे पहले किसने सीटी बजाकर उत्पन्न किया था? 
    - गाल्टन ने
65. ध्वनि का तारत्व (Pitch) किस पर निर्भर करता है?
    - आवृत्ति 
66. विमानों के आन्तरिक भागों की सफाई में किसका उपयोग किया जाता है? 
    - पराश्रव्य तरंग
67. मनुष्य को ध्वनि कम्पन की अनुभूति किस आवृति सीमा में होती है? 
      20-20,000 Hz
68. लगभग 20C तापक्रम पर किस माध्यम में ध्वनि की गति अधिकतम रहेगी?
    - लोहा 
69. ध्वनि के किस लक्षण के कारण कोई ध्वनि मोटी (Grave) या पतली (Shril) होती है? 
    - तारत्व (Pitch)
70. किसके द्वारा सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण होता है? 
    - हवाई जहाज की उड़ान भरना
71. कौन-सी प्रक्रिया प्रकाश और ध्वनि दोनों में घटित नहीं होती है?
    - ध्रुवण
72. ध्वनि का प्रभाव मानव के के कान में कितने समय तक रहता है? 
      1/10 सेकण्ड
73. ध्वनि तरंगे किसके कारण प्रतिध्वनि उत्पन्न करते हैं?
    - परावर्तन 
74. एक व्यक्ति को अपनी प्रतिध्वनि सुनने के लिये परावर्तक तल से कितनी दूर खड़ा रहना चाहिए? 
      56 फीट
75. स्टेथोस्कोप ध्वनि के किस सिद्धान्त पर कार्य करता है?
76. पास आती रेलगाड़ी की सीटी की आवृत्ति या तीक्ष्णता बढ़ती जाती है, ऐसा किस घटना के कारण होता है?
    - डॉप्लर प्रभाव
77. किस एक प्रकार की तरंग का प्रयोग रात्रि दृष्टि उपकरण में किया जाता है? 
    - अवरक्त तरंग
78. एक जेट वायुयान 2 मैक के वेग से हवा में उड़ रहा है। जब ध्वनि का वेग 332 मी./से है तो वायुयान की चाल कितनी है?
    -  664 मी./से.
79. लगभग 20०C के तापक्रम पर किस माध्यम में ध्वनि की गति अधिकतम होगी?
    - लोहा 
80. एक जैव पद्धति जिसमें पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग किया जाता है?
    - सोनोग्राफी 
81. कौन-सी तरंगें शून्य में संचरण नहीं कर सकतीं?
    - ध्वनि 
82. वह उपकरण जो ध्वनि तरंगों की पहचान तथा ऋजुरेखन के लिए प्रयुक्त होता है, क्या कहलाता है?
    - सोनार
83. प्रकाश तरंग किस प्रकार की तरंग है? 
    - अनुप्रस्थ तरंग
84. प्रकाश का तरंग सिद्धान्त किसके द्वारा प्रस्थापित किया गया था? 
    -  हाइगेन्स के द्वारा
85.किस घटना के आधार पर प्रकाश तरंगों के अनुपस्थ होने की पुष्टि होती है?
    -  ध्रुवण 
86. प्रकाश के विद्युत चुम्बकीय स्वरूप की खोज किसने की?
    - मैक्सवेल
87. किसने सर्वप्रथम यह दिखलाया कि प्रकाश तरंगों का विवर्तन होता है?
    - ग्रेमाल्डी
88. कौन-सी घटना प्रकाश और ध्वनि दोनों में घटित नहीं होती है?
    - ध्रुवण
89. कौन-सा सिद्धान्त प्रकाश के तरंग प्रकृति की पुष्टि करता है? 
    - व्यतिकरण का सिद्धान्त
90. चन्द्रमा से पृथ्वी तक आने में प्रकाश को लगभग कितना समय लगता है?
      1 सेकण्ड
91. सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग कितना समय लगता है? 
     8 मिनट 16.6 सेकेण्ड
92. वायु में प्रकाश की गति कितनी होती है?
     3x108 m/s
93. सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का कौन-सा भाग दिखायी देता है?
    -  किरीट (कोरोना)
94. पानी से भरे किसी बर्तन में पड़ा एक सिक्का किस कारण थोड़ा उठा हुआ प्रतीत होता है?
    - प्रकाश के अपवर्तन के कारण
95. पानी में डुबोई एक छड़ी किस संवृत्ति के कारण मुड़ी हुई प्रतीत होती है? 
    - प्रकाश का अपवर्तन
96. किसके कारण आकाश नीला दिखाई पड़ता है? 
    - प्रकीर्णन (Scattering)
97. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान में लाल रंग किसके कारण होता है?
    - प्रकीर्णन
98. इन्द्रधनुष में किस रंग का विक्षेपण अधिक होता है?
    - बैंगनी
99. सूखा बालू चमकीला क्यों दिखाई देता है, जबकि गीला बालू द्यत्तिहीन होता है? 
    - इसका कारण परावर्तन है।
100. जेट इंजन किसके संरक्षण के सिद्धान्त पर काम करता है?
    -रेखिक संवेग के
101. पेरिस्कोप बनाने में कौन-सा एक दर्पण प्रयुक्त होता है? 
    - समतल दर्पण
102. साबुन के पतले झाग में चमकदार रंगों का बनाना किस परिघटना का परिणाम है? 
    - बहुलित परावर्तन और व्यतिकरण
103. पिछली साइड के ट्रैफिक को देखने के लिए ऑटोमोबाइल में किस प्रकार के दर्पण का प्रयोग किया जाता है? 
     - उत्तल
104. वाहनों के अग्रदीपों (हेडलाइटों) किस प्रकार के दर्पण का इस्तेमाल होता है? 
    - परावलयिक दर्पण
105. कार चलाते समय अपने पीछे के यातायात को देखने के लिए किस प्रकार के दर्पण का प्रयोग करना चाहिए?
     - उत्तर दर्पण
106. मानव आंख की रेटिना पर कैसा प्रतिबिम्ब बनता है?
     - वास्तविक तथा उल्टा
107. जब कोई बस्तु दो समानान्तर समतल दर्पणों के बीच रखी जाती है, तो बने हुए प्रतिबिम्बों की संख्या होगी?
      - अनन्त
108. यदि एक व्यक्ति दो समतल दर्पण जो 60’ कोण पर आनत है, के बीच खड़ा हो तब उसे कितने प्रतिबिम्ब दिखेंगे? 
       -5
109. हम पृथ्वी के पृष्ठ पर सूर्य का प्रकाश प्राप्त करते हैं। ये प्रकाश किस प्रकार के किरणपुंज है?
    - समान्तर 
110. डाइऑप्टर किसकी इकाई है? 
    - लेंस की क्षमता की ।
111. श्वेत प्रकाश कितने रंगों के मेल से बना होता है?
        7
112. किस रंग का तरंगदैध्र्य अधिकतम होता है? 
    - लाल
113. सूर्य की किरणों में कितने रंग होते हैं?
       7 
114. यदि वायुमण्डल न हो तो पृथ्वी से आकाश किस रंग का दिखाई देगा?
    - काला 
115. फोटोग्राफिक कैमरे का कौन-सा भाग आंख की रेटिना की तरह कार्य करता है?
    - फिल्म 
116. कैमरे किस प्रकार का लेन्स उपयोग में लाया जाता है?
    - उत्तल 
117. मानव की आंख वस्तु का प्रतिबिम्ब किस भाग पर बनाती है?
    -  रेटिना
118. आंख के किस भाग द्वारा आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा निंयत्रित होती है?
    - आयरिस 
119. नेत्रदान में दाता की आंख के किस हिस्से को प्रतिरोपित किया जाता है?
    -  कोर्निया 
120. स्वस्थ नेत्र के लिये स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कितनी होती है? 
       25 सेमी.
121. यदि कोई व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख सकता है तो उसकी दृष्टि में कौन-सा दोष होगा?
       - निकट दृष्टि
122. दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के चश्में में कौन-सा लेन्स प्रयोग किया जाता है? 
    - उत्तल लेन्स
123. चश्मा प्रयुक्त करने वाले व्यक्तियों को सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग किस प्रकार करना चाहिए?
      - उन्हें चश्मा पहने रहना चाहिए
124. एक मनुष्य 1 मीटर से कम दूरी की वस्तु को स्पष्ट नहीं देख सकता है। वह व्यक्ति किस दोष से पीड़ित है?
      - दूर दृष्टि
125. घड़ी साज घड़ी के बारीक पुज को देखने के लिये किसका उपयोग करता है? 
       - आवर्धक लेन्स
126. दूर की वस्तुओं के निरीक्षण के लिये किस प्रकाशिक यंत्र का उपयोग किया जाता है?
    -  दूरदर्शी 
127. तन्तु प्रकाशिक संचार में संकेत किस रूप से प्रवाहित होता है? 
    - प्रकाश तरंग
128, काँचों में से कौन-सा एक पराबैंगनी किरणों का विच्छेदन कर सकता है? 
    - क्रुक्स काँच
129. प्रकाश के प्रकारों में से किनका पौधे द्वारा तीव्र अवशोषण होता है? 
    - नीला और लाल
130. जब प्रकाश की तरंगें वायु से कांच में होकर गुजरती है, तब कौन से परितत्र्य प्रभावित होंगे?
     - केवल तरंगदैर्य तथा वेग
131. निकट दृष्टिकोण दोष दूर करने के लिए कौन-सा लेन्स उपयोग में लाया जाता है? 
     -  नतोदर (concave)
132. अवतल लेंस हमेशा किस प्रकार का प्रतिबिम्ब बनाते हैं? 
    -  आभासी प्रतिबिम्ब
133. संचार में प्रयुक्त फाइबर ऑप्टिक केवल किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
       - प्रकाश के पूर्ण आन्तरिक परावर्तन
134. श्वेत प्रकाश को नली में कैसे पैदा करते हैं? .   
      - तन्तु को गर्म करके
135. प्रकाश की गति किसके बीच से जाते हुए न्यूनतम होती है?
    -  कांच 
136. किस तिथि को दोपहर को आपकी छाया सबसे छोटी होती है? 
     - 21 जून
137. फोटॉन (Photon) किसकी मूलभूत यूनिट मात्रा है?
     - प्रकाश 
138. विकिरण की कण प्रकृति की पुष्टि किससे की जाती है? 
     - प्रकाश वैद्यत प्रभाव
139. अबिन्दुकता का दोष दूर करने के लिए किस लेंस का प्रयोग करना चाहिए?
    -  सिलिंडरी लेंस
140. प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में किसके द्वारा बदला जाता है?
    -  रेक्टिफायर 
141. बिजली के बल्ब का फिलामेन्ट किस तत्व से बना होता है?
    -  टंगस्टन
142. ट्यूब लाइट (Tube Light) में व्यय ऊर्जा का लगभग कितना भाग प्रकाश में परिवर्तित होता है? 
        60-70%
143. तड़ित चालक का आविष्कार किसने किया। 
       - बेंजामिन फ्रेंकलिन
144. मानव शरीर (शुष्क) के विद्युत् प्रतिरोध के परिणाम की कोटि क्या है?
       1000000  ओम
145. विद्युत् उत्पन्न करने के लिए कौन-सी धातु का उपयोग होता है?
    -  यूरेनियम 
146. एकीकृत परिपथ में प्रयुक्त अर्द्धचालक चिप किसकी बनी होती है?
    -  सिलिकॉन 
147. यदि किसी प्रारूपी पदार्थ का वैद्युत प्रतिरोध गिरकर शून्य हो जाता है, तो उस पदार्थ को क्या कहते हैं? 
      - अर्द्धचालक
148. स्थिर वैद्युत अवक्षेपित्र का प्रयोग किसे नियंत्रित करने के लिए किया जाता है? 
      -  वायु प्रदूषक
149. लौह चुम्बकीय पदार्थों के भीतर परमाणुओं के असंख्य अति सूक्ष्म संरचनाओं को क्या कहा जाता है? 
      -  डोमेन
150. मुक्त रूप से निलम्बित चुम्बकीय सूई किस दिशा में टिकती है? 
      -  उत्तर दक्षिण दिशा
151. विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण के नियमों का उपयोग किसको बनाने में उपयोग किया गया है?
      -  जनित्र 
152. पृथ्वी एक बहुत बड़ा चुम्बक है। इसका चुम्बकीय क्षेत्र किस दिशा में में विस्तृत होता है? 
      -  दक्षिण से उत्तर
153. जिस तत्व में परमाणु में दो प्रोटॉन दो न्यूट्रॉन और दो इलेक्ट्रॉन हों, उस तत्व का द्रव्यमान संख्या कितना होता है?
       -  4
154. पृथ्वी की आयु का निर्धारण किस विधि द्वारा किया जाता है? 
        - यूरेनियम विधि
155. नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल (D2O) का प्रयोग किस रूप में किया जाता है?
      -  मंदक 
156. कूलिज नलिका का प्रयोग क्या उत्पन्न करने के लिए किया जाता है? 
      -  एक्स किरणें
157. परमाणु बम में विस्फोट में भारी मात्रा में ऊर्जा किसके कारण निकलती है? 
      -  दव्य का ऊर्जा में परिवर्तन
158. सेमीकंडक्टर में उसके प्रयोग के आधार पर अशुद्धियां किसलिए मिलायी जाती है? 
       - उसकी विद्युत चालकता बढ़ाने
159. जब जर्मेनियम जाली में आर्सेनिक परमाणु डाले जाते हैं, तो वह क्या बन जाता है?
      - बाह्य सेमीकंडक्टर
160. विद्युत् उत्पन्न करने के लिए कौन-सी धातु का उपयोग होता है?
      -  युरेनियम 
161. कृष्ण छिद्र (Block Hole) सिद्धान्त को किसने प्रतिपादित किया था? 
      -  एस. चन्द्रशेखर ने
162. नोबेले पुरस्कार एल्फ्रेड नोबेल के नाम पर शुरू हुआ जिन्होंने किसकी खोज की थी? 
      -डायनामाइट की
163. इस सदी की शुरूआत में हवाई जहाज का आविष्कार किसने की थी? 
      -  राइट ब्रदर्स
164इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार किसने किया था? 
      -  नोल और रूस्का
165. मेडिकल डॉक्टर्स/व्यावसायिकों द्वारा किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
      -  स्टेथोस्कोप 
166. महासागर में डूबी हुई वस्तुओं की स्थिति जानने के लिए किस यंत्र का प्रयोग किया जाता है?
      -  सोनार 
167. सूर्य की किरणों की तीव्रता मापने वाले उपकरण को क्या कहते हैं?
      -  हाईग्रोमीटर 
168. एक उड़ते हुए चक्के की प्रति सेकण्ड घूर्णन किससे मापी जाती है?
      -  स्त्रोबोस्कोप 
169. कौन-सा उपकरण चिकित्सकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है?
      -  स्टेथोस्कोप 
170. चन्द्रा एक्स रे दूरबीन का नाम किस वैज्ञानिक के समान में रख गया? 
      -  एसचन्द्रशेखर
171. साइक्लोट्रान किसको त्वरित करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है?
      -  परमाणु 
172. पाइरोमीटर किसके मापने में प्रयोग में लाया जाता है?
      - उच्च तापमान
173. कूलिज-नालिका का प्रयोग क्या उत्पन्न करने के लिये किया जाता है?
      -  एक्स किरणें
174. इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर का आविष्कार किसने किया ?
      -  एकोर्ट एवं मॉशली
भौतिक विज्ञान - सामान्य ज्ञान [PHYSICS - GENERAL KNOWLEDGE] भौतिक विज्ञान - सामान्य ज्ञान [PHYSICS - GENERAL KNOWLEDGE] Reviewed by rajyashikshasewa.blogspot.com on 9:44 PM Rating: 5
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