Results for वाक्यांश

वाक्यांश इ

वाक्यांश इ  


वाक्यांश या शब्द-समूहशब्द
किसी चीज़ या बात की इच्छा रखने वालाइच्छुक
अपनी इच्छा के अनुसार काम करने वालाइच्छाकारी
किन्हीं घटनाओं का कालक्रम से किया गया वृतइतिवृत
इन्द्रियों को वश में करने वालाइन्द्रियजित
इन्द्रियों पर किया जाने वाला वशइंद्रियविग्रह
जो इन्द्रियों के ज्ञान के बाहर हैइंद्रियातीत
इतिहास को जानने वालाइतिहासज्ञ

इन्द्रियाँ  

  1. घ्राणेन्द्रिय से गंध का ग्रहण होता है, इससे वह पृथ्वी से बनी है।
  2. रसना जल से बनी है, क्योंकि रस जल का गुण है।
  3. चक्षु इन्द्रिय तेज़ से बनी है, क्योंकि रूप तेज़ का गुण है।
  4. त्वक् वायु से बनी है, क्योंकि स्पर्श वायु का गुण है।
  5. श्रोत्र इन्द्रिय आकाश से बनी है, क्योंकि शब्द आकाश का गुण है।
न्याय के अनुसार इंद्रियाँ दो प्रकार की होती हैं : (1) बहिरिंद्रिय-घ्राण, रसना, चक्षु, त्वक्‌ तथा श्रोत्र (पाँच) और (2) अंतरिंद्रिय-केवल मन (एक)। इनमें बाह्य इंद्रियाँ क्रमश: गंध, रस, रूप स्पर्श तथा शब्द की उपलब्धि मन के द्वारा होती हैं। सुख दु:ख आदि भीतरी विषय हैं। इनकी उपलब्धि मन के द्वारा होती है। मन हृदय के भीतर रहनेवाला तथा अणु परमाणु से युक्त माना जाता है। इंद्रियों की सत्ता का बोध प्रमाण, अनुमान से होता है, प्रत्यक्ष से नहीं सांख्य के अनुसार इंद्रियाँ संख्या में एकादश मानी जाती हैं जिनमें ज्ञानेंद्रियाँ तथा कर्मेंद्रियाँ पाँच-पाँच मानी जाती हैं। ज्ञानेंद्रियाँ पूर्वोक्त पाँच हैं, कर्मेंद्रियाँ मुख, हाथ, पैर, मलद्वार तथा जननेंद्रिय हैं जो क्रमश: बोलने, ग्रहण करने, चलने, मल त्यागने तथा संतानोत्पादन का कार्य करती है। संकल्पविकल्पात्मक मन ग्यारहवीं इंद्रिय माना जाता है।
  • बौद्धों के मत से शरीर में गोलक देखे जाते हैं, उन्हीं को इन्द्रियाँ कहते हैं, (जैसे आँख की पुतली, जीभ इत्यादि)। परन्तु नैयायिकों के मत से जो अंग दिखाई पड़ते हैं, वे इंन्द्रियों के अधिष्ठान मात्र हैं, इन्द्रियाँ नहीं हैं।
  • इन्द्रियों का ज्ञान इन्द्रियों के द्वारा नहीं हो सकता। कुछ लोग एक ही त्वक् इन्द्रिय मानते हैं।
  • न्याय में उनके मत का खण्डन करके इन्द्रियों का नानात्व स्थापित किया गया है।
  • सांख्य में पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और मन को लेकर ग्यारह इन्द्रियाँ मानी गई हैं। पर मन एक आन्तरिक करण और अणुरूप माना गया है।
  • यदि मन सूक्ष्म न होकर व्यापक होता तो युगपत कई प्रकार का ज्ञान सम्भव होता, अर्थात् अनेक इन्द्रियों का एक क्षण में एक साथ संयोग होते हुए भी उन सब के विषयों का एक साथ ज्ञान हो जाता। पर नैयायिक ऐसा नहीं मानते हैं।
  • गंध, रस, रूप, स्पर्श और शब्द ये पाँचों गुण इन्द्रियों के अर्थ या विषय हैं।
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वाक्यांश आ

वाक्यांश आ


वाक्यांश या शब्द-समूहशब्द
अपने प्राण आप लेने वालाआत्मघाती
पैर से लेकर सिर तकआपादमस्तक
ऐसा व्रत, जो मरने पर ही समाप्त होआमरणव्रत
किसी पात्र आदि के अन्दर का स्थान, जिसमें कोई चीज़ आ सकेआयतन
दूसरे के हित में अपने आप को संकट में डालनाआत्मोत्सर्ग
अर्थ या धन से सम्बन्ध रखने वालाआर्थिक
वह स्त्री जिसका पति परदेश से लौटा होआगतपतिका
वह स्त्री जिसका पति आने वाला हैआगमिस्यतपतिका
किसी बात पर बार-बार ज़ोर देनाआग्रह
वह जो अपने आचार से पवित्र हैआचारपूत
सामाजिक एवं प्रशासनिक अनुशासन की अपने क्रूरता से उत्पन्न स्थितिआतंक
देश में विदेश से माल आने की क्रियाआयात
जो जन्म लेते ही गिर या मर गया हैआदण्डपात
सर्वप्रथम मत को प्रवर्तित करने वालाआदिप्रवर्तक
आदि से अंत तकआद्योपांत
गुण-दोषों का विवेचन करने वालाआलोचक
जिसे आश्वासन दिया गया होआश्वस्त
वह कवि जो तत्क्षण कविता कर सकेआशुकवि
आयोजन करने वाला व्यक्तिआयोजक
धन से संबंध रखने वालाआर्थिक
जो आलोचना के योग्य होआलोच्य
किसी अवधि से संबंध रखने वालाआवधिक
आशुलिपि[1] जानने वाला लिपिकआशुलिपिक
किसी देश के वे निवासी जो पहले से वहाँ रहते रहे हैंआदिवासी
ईश्वर में विश्वास रखने वालाआस्तिक
जिसकी बाँहें जानु[2] तक पहुँचती होंआजानुबाहु
आशा से अतीत [3]आशातीत
सेतुबंध रामेश्वरम से हिमालय तकआसेतु हिमालय
बालक से वृद्ध तकआबालवृद्ध
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वाक्यांश अ

वाक्यांश अ  


वाक्यांश या शब्द-समूहशब्द
जो नेत्रों से दिखाई न देअगोचर
जो इन्द्रियों से परे होअगोचर
समाचार पत्र का मुख्य लेखअग्रलेख
जिसकी कल्पना न की जा सकेअकल्पनीय
जो कहा न जा सकेअकथनीय
आगे का विचार करने वालाअग्रसोची
जो सबके आगे रहता होअग्रणी
जिसका ज्ञान इन्द्रियों के द्वारा न होअगोचर
जो ख़ाली न जायेअचूक
जो अपने स्थान या स्थिति से अलग न किया जा सकेअच्युत
जिसकी चिंता नहीं हो सकतीअचिंत्य
हाथी को हाँकने वाला लोहे का हुकअंकुश
जो खाया न जा सकेअखाद्य
जिसका जन्म पहले हुआ होअग्रज
जो छूने योग्य न होअछूत
जो छुआ न गया होअछूता
जो बूढ़ा ना होअजर
जिसका कोई शत्रु उत्पत्र न हुआ होअजातशत्रु
जिसे जीता न जा सकेअजेय
जो जाना ना गया होअज्ञात
जो कुछ नहीं जानता होअज्ञानी
जिसके कुल का पता ज्ञात न होअज्ञातकुल
जिस हँसी से अट्टालिका तक हिल जायेअट्टहास
जो अपनी बात से न टलेअटल
न टूटने वालाअटूट
जो अपनी जगह से न डिगेअडिग
आढ़त का व्यापार करने वालाआढ़तिया
पदार्थ का सबसे छोटा इन्द्रिय-ग्राह्य विभाग या मात्राअणु
सीमा का अनुचित उल्लंघनअतिक्रमण
जिसके आने की तिथि ज्ञात न होअतिथि
किसी कथा के अंतर्गत आने वाली दूसरी कथाअंत:कथा
जो सबके मन की जानता होअन्तर्यामी
आवश्यकता से अधिक वर्षाअतिवृष्टि
किसी बात या कथन को बढ़ा-चढ़ा कर कहनाअतिशयोक्ति
जो बीत गया हैअतीत
इन्द्रियों की पहुँच से बाहरअतींद्रिय
जिसकी तुलना न की जा सकेअतुलनीय
जो दबाया न जा सकेअदम्य
जो देखा न जा सकेअदृश्य
जिसके समान दूसरा न होअद्वितीय
जो देखने योग्य न होअदर्शनीय
जो पहले ना देखा गया होअदृष्टपूर्व
धर्म या शास्त्र के विरुद्ध कार्यअधर्म
अधिकार या कब्ज़े में आया हुआअधिकृत
सर्वाधिकार सम्पन्न शासक या अधिकारीअधिनायक
विधानमंडल द्वारा परित या स्वीकृत नियमअधिनियम
कर या शुल्क का वह अंश जो किसी कारणवश अधिक से अधिक लिया जाता हैअधिभार
वह पत्र, जिसमें किसी को कोई काम करने का अधिकार दिया जायेअधिपत्र
किसी पक्ष का समर्थन करने वालाअधिवक्ता
वास्तविक मूल्य से अधिक लिया जाने वाला शुल्कअधिशुल्क
सरकार द्वारा प्रकाशित या सरकारी बजट में छपी सूचनाअधिसूचना
किसी कार्यालय या विभाग का वह अधिकारी जो अपने अधीन कार्य करने वाले कर्मचारियों की निगरानी रखेअधीक्षक
किसी सभा, संस्था का प्रधानअध्यक्ष
नीचे की ओर मुख किये हुएअधोमुख
राज्य के अधिपति द्वारा जारी किया गया वह अधिकारिक आदेश जो किसी विशेष समय तक ही लागू होअध्यादेश
वह स्त्री जिसका पति दूसरा विवाह कर लेअध्गूढ़ा
अन्य से सम्बंध न रखने वालाअनन्य
जिसका कोई दूसरा उपाय न होअनन्योपाय
जिसका स्वामी न होअनाथ
जिसका आदर न किया गया होअनादृत
दूसरों के गुणों में दोष दूँढने की वृति का न होनाअनसूया
जिसका वचन द्वारा वर्णन न किया जा सकेअनिवर्चनीय
जिसका निवारण न किया जा सकेअनिवार्य
बिना पलक गिराये हुएअनिमेष
जिसका उच्चारण न किया जा सकेअनुच्चरित
जो परीक्षा में उत्तीर्ण न हुआ होअनुत्तीर्ण
किसी कार्य के लिए दी जाने वाली सहायताअनुदान
जिसकी उपमा न दी जा सकेअनुपम
जिसका अनुभव किया गया होअनुभूत
किसी मत या प्रस्ताव का समर्थन करने की क्रियाअनुमोदन
किसी व्यक्ति या सिद्धांत का समर्थन करने वालाअनुयायी
एक भाषा की लिखी हुई बात को दूसरी भाषा में लिखना या कहनाअनुवाद
परम्परा से चली आई हुई बात, उक्ति या कलाअनुश्रुति
जिसका मन किसी दूसरी ओर होअन्यमनस्यक/अनमना
जिसका कोई निश्चित घर न होअनिकेत
नीचे की ओर लाना या खींचनाअपकर्ष
जो पहले पढ़ा न गया होअपठित
दोपहर के बाद का समयअपराह्न
शरीर के लिए जितना धन आवश्यक हो उससे अधिक न लेनाअपरिग्रह
जो मापा न जा सकेअपरिमेय
जिसके बिना कार्य न चल सकेअपरिहार्य
जो आँखों के सामने न होअप्रत्यक्ष/परोक्ष
जिसके पार न देखा जा सकेअपारदर्शक/अपारदर्शी
जो पूरा या भरा हुआ न होअपूर्ण
जिसकी अपेक्षा (उम्मीद) होअपेक्षित
अभिनय करने वाला पुरुषअभिनेता
अभिनय करने वाली स्त्रीअभिनेत्री
जो किसी की ओर मुँह किये हुए होअभिमुख
जिस पर अभियोग लगाया गया होअभियुक्त
जिसका जन्म उच्च कुल में हुआ होअभिजात
किसी कार्य को बार-बार करनाअभ्यास
भली प्रकार से सीखा हुआअभ्यस्त
किसी वस्तु का भीतरी भागअभ्यन्तर
किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छाअभीप्सा
जो कभी मृत्यु को प्राप्त न होअमर
जो काव्य, संगीत आदि का रस न लेअरसिक
द्वार या आँगन के फर्श पर रंगों से चित्र बनाने या चौक पूरने की कलाअल्पना
जो अल्प (कम) जानता होअल्पज्ञ
जो इस लोक का न होअलौकिक
जो कम बोलता होअल्पभाषी
शरीर का कोई भागअवयव
जिस पर विचार न किया गया होअविचारित
सरकार द्वारा दूसरे देश की तुलना में अपने देश की मुद्रा का मूल्य कम कर देनाअवमूल्यन
बिना वेतन के कार्य करने वालाअवैतनिक
जो साधा (ठीक किया) न जा सकेअसाध्य
जो शोक करने योग्य नहीं हैअशोक्य
जो स्त्री (ऐसी पर्दानशीन है कि) सूर्य को भी न देख सकेअसूर्यम्पश्या
जिसका विभाजन न किया जा सकेअविभाजित
अच्छा-बुरा समझने की शक्ति का अभावअविवेक
जो विधान या नियम के विरुद्ध होअसंवैधानिक
जिसमें शक्ति नहीं हैअशक्त
न हो सकने वालाअशक्य/असंभव
गुरु के समीप रहने वाला विद्यार्थीअंतेवासी
जिसका जन्म छोटी (अंत्य) जाति में हुआ होअंत्यज
जिसका जन्म अनु (पीछे) हुआ होअनुज
जो पहले कभी भी न हुआ होअभूतपूर्व
जो बीत चुका हैअतीत
जिसकी गहराई की थाह न लग सकेअथाह
जो सदा से चलता आ रहा हैअनवरत
जो आगे की न सोचता होअदूरदर्शी
धरती और आकाश के बीच का स्थानअंतरिक्ष
जिस पर आक्रमण न किया गया होअनाक्रान्त
जो जीता न जा सकेअजेय
जिसके पास कुछ न होअकिंचन
जो क़ानून के विरुद्ध होअवैध
जो समय पर न होअसामयिक
अपने हिस्से या अंश के रूप में कुछ देनाअंशदान
जिसमें कुछ करने की क्षमता न होअक्षम
जो गिना न जा सकेअनगिनत
जो कार्य रूप में न लाया जा सकेअव्यावहारिक
जिसका खण्डन न हो सकेअकाट्य
जिस पर मुक़दमा चल रहा होअभियुक्त
जिसकी सीमा न होअसीम/असीमित
जो दिया न जा सकेअदेय
अनुकरण करने योग्यअनुकरणीय
जो मानव के योग्य न होअमानुषिक
जो बिना बुलाये आया होअनाहूत
जिस पर कोई नियंत्रण न होअनियंत्रित
जो शोक करने योग्य नहींअशोक्य
फेंककर चलाया जाने वाला हथियारअस्त्र
किसी प्राणी को न मारनाअहिंसा
अंडे से जन्म लेने वालाअंडज
महल का भीतरी भागअंत:पुर
जिसे अधिकार दिया गया होअधिकृत
जारी किया गया आधिकारिक आदेशअध्यादेश
वर्षा का अभावअनावृष्टि
जिस पर निर्णय न हुआ होअनिर्णीत
जिस पर अनुग्रह किया गया होअनुग्रहीत
सीमा का उल्लंघन करनाअतिक्रमण
जो पहले कभी नहीं सुना गया होअश्रुतपूर्व
जिसमें सामर्थ्य नहीं हैअसमर्थ
जिसकी आशा न की जायेअप्रत्याशित
जिसे पढ़ा न जा सकेअपाठ्य
जिसे भेदा (तोड़ा) न जो सकेअभेद्य
आत्मा व परमात्मा का द्वैत (अलग-अलग होना) न मानने वालाअद्वैतवादी
अल्प (कम) वेतन भोगने वाला (पाने वाला)अल्पवेतनभोगी
अध्ययन (पढ़ना) प्राप्त करने वालाअध्यापक
आग से झुलसा हुआअनलदग्ध
जहाँ गमन (जाया) न किया जा सकेअगम्य
जो हिसाब-क़िताब की जाँच करता होअंकेक्षक
जिसकी परिभाषा देना संभव न होअपरिभाषित
जो पहले कभी घटित न हुआ होअघटित
वह पत्र जिसमें किसी को कुछ करने का अधिकार दिया गया होअधिपत्र
वाक्यांश अ वाक्यांश अ  Reviewed by rajyashikshasewa.blogspot.com on 10:53 PM Rating: 5

वाक्यांश

वाक्यांश के लिए एक शब्द 


हिन्दी भाषा में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द बोल कर हम भाषा को प्रभावशाली एवं आकर्षक बनाते हैं। इसी प्रकार, अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कर सकते हैं। भाषा की सुदृढ़ता, भावों की गम्भीरता और चुस्त शैली के लिए यह आवश्यक है कि लेखक शब्दों (पदों) के प्रयोग में संयम से काम ले, ताकि वह विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े-से-थोड़े शब्दों में व्यक्त कर सके।
समास, तद्धित और कृदन्त वाक्यांश या वाक्य एक शब्द या पद के रूप में संक्षिप्त किये जा सकते हैं। ऐसी हालत में मूल वाक्यांश या वाक्य के शब्दों के अनुसार ही एक शब्द या पद का निर्माण होना चाहिए। दूसरा तथ्य यह कि वाक्यांश को संक्षेप में सामासिक पद का भी रूप दिया जाता है। कुछ ऐसे लाक्षणिक पद या शब्द भी हैं, जो अपने में पूरे एक वाक्य या वाक्यांश का अर्थ रखते हैं। भाषा में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द बोल कर हम भाषा को प्रभावशाली एवं आकर्षक बनाते हैं, जैसे-
उदाहरण - 1.

"राम कविता लिखता है।" - इस वाक्य में अनेक शब्दों के स्थान पर हम एक ही शब्द 'कवि' का प्रयोग कर सकते हैं।
उदाहरण - 2.
"जिस स्त्री का पति मर चुका हो।" - इस वाक्य में शब्द-समूह के स्थान पर 'विधवा' शब्द का प्रयोग करना अधिक उपयुक्त है।
इसी प्रकार अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कर सकते है। यहाँ पर अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं-
क्रमांकवाक्यांश या शब्द-समूहशब्द
1.जिसका जन्म नहीं होताअजन्मा
2.पुस्तकों की समीक्षा करने वालासमीक्षक , आलोचक 
3.जिसे गिना न जा सकेअगणित 
4.जो कुछ भी नहीं जानता होअज्ञ 
5.जो बहुत थोड़ा जानता होअल्पज्ञ 
6.जिसकी आशा न की गई होअप्रत्याशित 
7.जो इन्द्रियों से परे होअगोचर 
8.जो विधान के विपरीत होअवैधानिक 
9.जो संविधान के प्रतिकूल होअसंवैधानिक 
10.जिसे भले-बुरे का ज्ञान न होअविवेकी 
11.जिसके समान कोई दूसरा न होअद्वितीय 
12.जिसे वाणी व्यक्त न कर सकेअनिर्वचनीय 
13.जैसा पहले कभी न हुआ होअभूतपूर्व 
14.जो व्यर्थ का व्यय करता होअपव्ययी 
15.बहुत कम खर्च करने वालामितव्ययी 
16.सरकारी गजट में छपी सूचनाअधिसूचना 
17.जिसके पास कुछ भी न होअकिंचन 
18.दोपहर के बाद का समयअपराह्न 
19.जिसका निवारण न हो सकेअनिवार्य 
20.देहरी पर रंगों से बनाई गई चित्रकारीअल्पना 
21.आदि से अन्त तकआघन्त 
22.जिसका परिहार करना सम्भव न होअपरिहार्य 
23.जो ग्रहण करने योग्य न होअग्राह्य 
24.जिसे प्राप्त न किया जा सकेअप्राप्य 
25.जिसका उपचार सम्भव न होअसाध्य 
26.भगवान में विश्वास रखने वालाआस्तिक 
27.भगवान में विश्वास न रखने वालानास्तिक 
28.आशा से अधिकआशातीत 
29.ऋषि की कही गई बातआर्ष 
30.पैर से मस्तक तकआपादमस्तक 
31.अत्यंत लगन एवं परिश्रम वालाअध्यवसायी 
32.आतंक फैलाने वालाआंतकवादी 
33.देश के बाहर से कोई वस्तु मंगानाआयात 
34.जो तुरंत कविता बना सकेआशुकवि 
35.नीले रंग का फूलइन्दीवर 
36.उत्तर-पूर्व का कोणईशान 
37.जिसके हाथ में चक्र होचक्रपाणि 
38.जिसके मस्तक पर चन्द्रमा होचन्द्रमौलि 
39.जो दूसरों के दोष खोजेछिद्रान्वेषी 
40.जानने की इच्छाजिज्ञासा 
41.जानने को इच्छुकजिज्ञासु 
42.जीवित रहने की इच्छाजिजीविषा 
43.इन्द्रियों को जीतने वालाजितेन्द्रिय 
44.जीतने की इच्छा वालाजिगीषु 
45.जहाँ सिक्के ढाले जाते हैंटकसाल
46.जो त्यागने योग्य होत्याज्य 
47.जिसे पार करना कठिन होदुस्तर 
48.जंगल की आगदावाग्नि
49.गोद लिया हुआ पुत्रदत्तक 
50.बिना पलक झपकाए हुएनिर्निमेष 
51.जिसमें कोई विवाद ही न होनिर्विवाद 
52.जो निन्दा के योग्य होनिन्दनीय 
53.मांस रहित भोजननिरामिष 
54.रात्रि में विचरण करने वालानिशाचर 
55.किसी विषय का पूर्ण ज्ञातापारंगत 
56.पृथ्वी से सम्बन्धितपार्थिव 
57.रात्रि का प्रथम प्रहरप्रदोष 
58.जिसे तुरंत उचित उत्तर सूझ जाएप्रत्युत्पन्नमति 
59.मोक्ष का इच्छुकमुमुक्षु 
60.मृत्यु का इच्छुकमुमूर्षु 
61.युद्ध की इच्छा रखने वालायुयुत्सु 
62.जो विधि के अनुकूल हैवैध 
63.जो बहुत बोलता होवाचाल
64.शरण पाने का इच्छुकशरणार्थी 
65.सौ वर्ष का समयशताब्दी 
66.शिव का उपासकशैव 
67.देवी का उपासकशाक्त 
68.समान रूप से ठंडा और गर्मसमशीतोष्ण 
69.जो सदा से चला आ रहा होसनातन
70.समान दृष्टि से देखने वालासमदर्शी 
71.जो क्षण भर में नष्ट हो जाएक्षणभंगुर 
72.फूलों का गुच्छास्तवक 
73.संगीत जानने वालासंगीतज्ञ 
74.जिसने मुक़दमा दायर किया हैवादी 
75.जिसके विरुद्ध मुक़दमा दायर किया हैप्रतिवादी 
76.मधुर बोलने वालामधुरभाषी 
77.धरती और आकाश के बीच का स्थानअंतरिक्ष 
78.हाथी के महावत के हाथ का लोहे का हुकअंकुश 
79.जो बुलाया न गया होअनाहूत 
80.सीमा का अनुचित उल्लंघनअतिक्रमण 
81.जिस नायिका का पति परदेश चला गया होप्रोषित पतिका
82.जिसका पति परदेश से वापस आ गया होआगत पतिका 
83.जिसका पति परदेश जाने वाला होप्रवत्स्यत्पतिका 
84.जिसका मन दूसरी ओर होअन्यमनस्क 
85.संध्या और रात्रि के बीच की वेलागोधुलि 
86.माया करने वालामायावी 
87.किसी टूटी-फूटी इमारत का अंशभग्नावशेष 
88.दोपहर से पहले का समयपूर्वाह्न 
89.कनक जैसी आभा वालाकनकाय 
90.हृदय को विदीर्ण कर देने वालाहृदय विदारक 
91.हाथ से कार्य करने का कौशलहस्तलाघव 
92.अपने आप उत्पन्न होने वालास्त्रैण 
93.जो लौटकर आया हैप्रत्यागत 
94.जो कार्य कठिनता से हो सकेदुष्कर 
95.जो देखा न जा सकेअलक्ष्य 
96.बाएँ हाथ से तीर चला सकने वालासव्यसाची 
97.वह स्त्री जिसे सूर्य ने भी न देखा होअसुर्यम्पश्या 
98.यज्ञ में आहुति देने वालाहोता
99.जिसे नापना सम्भव न होअसाध्य 
100.जिसने किसी दूसरे का स्थान अस्थाई रूप से ग्रहण किया होस्थानापन्न







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