इतिहास- सिन्धु सभ्यता की देन एवं विदेशों से सम्बन्ध [CONTRIBUTION OF INDUS CIVILIZATION AND RELATION OF INDUS CIVILIZATION WITH FOREIGIN COUNTRIES]

CONTRIBUTION OF INDUS CIVILIZATION AND RELATION OF INDUS CIVILIZATION WITH FOREIGIN COUNTRIES
सिन्धु सभ्यता की देन एवं विदेशों से सम्बन्ध

सिन्धु सभ्यता की देन [CONTRIBUTION OF INDUS  CIVILIZATION]

इतिहासकारों का मानना है कि सिन्धु घाटी सभ्यता सभी प्राचीन सभ्यताओं में सर्वश्रेष्ठ थी। सिन्धु सभ्यता की देन के विषय में डॉ. राधाकुमुद मुखर्जी ने लिखा है, "सिन्धु सभ्यता के लोगों ने सबसे पहले नगर दिए, सबसे पहले नागरिक सभ्यता प्रदान की, सबसे पहले नगर योजना उपलब्ध कराई, बाढ़ से बचने के लिए सबसे पहले पत्थर और ईटों के बाँध दिए और सफाई के लिए सबसे पहले जल निकास व्यवस्था प्रदान की। उनको ही सबसे पहले मिट्टी के बर्तन बनाने का श्रेय प्राप्त है।"

सिन्धु सभ्यता का विदेशों से सम्बन्ध (RELATION OF INDUS CIVILIZATION WITH FOREIGIN COUNTRIES)

सिन्धु सभ्यता के विभिन्न स्थलों के उत्खनन से ज्ञात होता है कि सिन्धु सभ्यता के लोगों के विश्व के अन्य देशों के साथ भी सम्बन्ध थे। यह सम्बन्ध राजनीतिक थे अथवा नहीं ? इसमें सन्देह है, किन्तु यह निश्चित है कि उनके अन्य देशों से व्यापारिक सम्बन्ध थे। सिन्धु सभ्यता के व्यापारिक आदान-प्रदान ने सांस्कृतिक क्षेत्र में भी एक-दूसरे को प्रभावित किया। उदाहरण के तौर पर कहा जा सकता है कि सिन्धु एवं सुमेर सभ्यता में काफी समानता है। सुमेर में अनेक मुहरें  प्राप्त हुई हैं जो सिन्धु सभ्यता की मुहरों से एकरूपता रखती हैं, परन्तु दोनों सभ्यताओं में किसने किसको प्रभावित किया, इस विषय पर विद्वान एकमत नहीं हैं। इसी प्रकार मिस्र में मिले आभूषणों और श्रृंगार के प्रसाधनों से स्पष्ट होता है कि वे सिन्धु सभ्यता के आभूषणों व श्रृंगार प्रसाधनों के लगभग समान ही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सिन्धुवासियों का विश्व की अन्य प्राचीन सभ्यताओं से घनिष्ठ सम्बन्ध था।
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